मुंबई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद और ठाणे से गिरफ्तार किए गए आइएस के 10 संदिग्ध मुंबई में एक साथ कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में थे। गैंग जहां 400 साल पुराने मुंब्रेश्वर मंदिर के महाप्रसाद में जहर मिलने का षड्यंत्र कर रहा था, वहीं बीएमसी के एक अस्पताल समेत भीड़भाड़ वाले इलाकों में अलग-अलग तरीकों से बड़ी वारदातों को अंजाम देने की भी योजना थी।

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) को जांच के दौरान जानकारी मिली कि आइएस संदिग्ध महाशिवरात्रि के अवसर पर चार मार्च को मुंब्रा स्थित श्री मुंब्रेश्वर मंदिर ट्रस्ट के महाप्रसाद में जहर मिलाना चाहते थे। मंदिर के ट्रस्टी हीरालाल गुप्ता के अनुसार, '28 जनवरी को एटीएस की टीम ने संदिग्ध ताला पॉट्रिक के साथ मंदिर का दौरा किया। टीम ने यहां सीन का निर्माण करते हुए समझने की कोशिश की कि गैंग किस तरह वारदात को अंजाम देना चाहता था।

टीम रसोई में काम करने वाले लोगों से भी मिली, जिन्होंने पिछले साल श्रीमद्भागवत कथा के लिए महाप्रसाद बनाया था। सूत्र बताते हैं कि उस दिन पॉट्रिक विफल हो गया था और इसके बाद उसने चार मार्च को वारदात को अंजाम देने का षड्यंत्र रचा था।'

गैंग का दूसरा लक्ष्य दक्षिण मुंबई में स्थित बीएमसी का एक अस्पताल था। उम्मत ए मोहम्मदिया के वाट्सएप ग्रुप से इसकी जानकारी मिली है। इसमें अस्पताल में काम करने वाले जैनम कुट्टेपड़ी की कई चैट उपलब्ध हैं। वारदात की तिथि तय होने के बाद वह अस्पताल से इस्तीफा देकर वहां की दवाओं में जहर मिलाने वाला था।

सभी को बांटी गई थी अलग-अलग जिम्मेदारी

महाप्रसाद में जहर मिलाने की जिम्मेदारी पॉट्रिक को थी, जबकि जैनम कुट्टेपड़ी पर पैसा जुटाने का जिम्मा था। सरफराज अहमद वाहन चालक है और उसे बड़ी गाड़ी से भीड़भाड़ वाले इलाके में फ्रांस की तरह हमले के लिए कहा गया था। तकी खान आइईडी बम बना रहा था और संदिग्ध किशोर उसका साथ दे रहा था। इसका इस्तेमाल आत्मघाती दस्ते में किया जाना था। मोहसिन खान ने मुंबई, ठाणे व कल्याण का दौरा कर पाइपलाइन और डैम का निरीक्षण किया था। पुलिस को उसके लैपटॉप से तस्वीरें भी मिली हैं। दाऊद के गुर्गे राशिद मल्बरी के बेटे मजहर शेख पर सभी संदिग्धों को सुरक्षित विदेश भेजने का जिम्मा था।

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