महाराष्ट्र में मराठी को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद अहम आदेश जारी किया है। इस आदेश को ना मानने वाले सरकारी अधिकारियों को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है और उनका इंक्रीमेंट तक रूक सकता है। राज्य सरकार ने इसे लेकर एक सर्कुलर तक जारी कर दिया है जिसमें सभी प्रशासनिक कामों में मराठी के उपयोग के निर्देश हैं। जिस सामान्य प्रशासन विभाग से निर्देश जारी हुए हैं वो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास है।

प्रदेश सरकार के सर्कुलर में कहा गया है कि राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों, मंत्रालयों, निकाय कार्यालयों में आधिकारिक उपयोग के लिए मराठी भाषा का उपयोग किया जाए। जो कर्मचारी ऐसा नहीं करते हैं उन्हें या तो चेतावनी दी जाएगी या फिर उनका सालाना इंक्रीमेंट रोक दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि दोषी पाए जाने पर छूट तब ही मिलेगी जब उसके पीछे कोई ठोस वजह बताई जाए। इसमें सरकारी विज्ञापनों और स्लोगन्स में हिंदी और अंग्रेजी के उपयोग को भी संज्ञान में लाया गया है।

हालांकि, इस तरह के आदेश पहले भी जारी किए जा चुके हैं लेकिन उन पर कोई खास अमल नहीं हो पाया। इसे लेकर गंभीरता जताई गई है। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित विभाग सरकारी आदेश का गंभीरता से पालन करें।

बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी मानुष का मुद्दा हमेशा से गर्म रहा है और मराठी बोलने को लेकर भी कई बार बहस हो चुकी है। राज्य में सत्ता में रहने वाली शिवसेना हमेशा से ही इस मराठी विमर्श पर जोर देती रही है।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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