पणजी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से देश के रक्षा मंत्री तक का सफर करने वाले मनोहर पर्रीकर काजल की कोठरी (राजनीति) में रहकर भी बेदाग रहने वाले शख्सियत थे। गोवा की उथल-पुथल भरी राजनीति में वह हमेशा आम आदमी ही बने रहे।

ये उनकी सादगी ही थी कि भाजपा के साथ ही दूसरे दलों के नेता भी उन्हें पसंद करते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह अपने लंबरेटा स्कूटर से मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए निकल जाया करते थे। कांग्र्रेस के वर्चस्व वाले गोवा में भाजपा की नींव जमाने का श्रेय भी पर्रीकर को ही जाता है।

संघ के प्रचार रहे पर्रीकर शुरू से ही संघ से जुड़े रहे। बाम्बे आइआइटी से इंजीनियरिंग करने के बाद भी संघ से उनका नाता बना रहा। उन्होंने संघ से जुड़ाव को कभी छिपाया भी नहीं।

वह संघ के सालाना 'संचलन' कार्यक्रम में भी भाग लेते थे। खाकी हाफ पैंट की वर्दी और लाठी के साथ वो फोटो भी शेयर करते थे। उनके रक्षा मंत्री रहते हुए जब गुलाम कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था, तब उन्होंने इसका श्रेय संघ की शिक्षा को ही दी थी।

1994 में शुरू हुई सियासी पारी पर्रीकर की चुनावी राजनीति की शुरुआत 1994 में हुई, जब भाजपा के टिकट पर वह पणजी से विधायक चुने गए। वह जून से नवंबर, 1999 के बीच गोवा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे थे।

पहली बार वह 24 अक्टूबर, 2000 को गोवा के मुख्यमंत्री बने। लेकिन उनका यह कार्यकाल 27 फरवरी, 2002 तक ही रहा। 5 जून, 2002 को वह दोबारा चुने गए और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने।

2007 के विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2012 के चुनाव में पर्रीकर के नेतृत्व में भाजपा ने एतिहासिक सफलता हासिल की। उसे 40 में से 21 सीटों पर जीत मिली थी। वह तीसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने। चौथी बार 2017 में वह गोवा के मुख्यमंत्री बने थे।

2018 से बीमार रहने लगे

पर्रीकर की सेहत 2018 से खराब रहने लगी। पिछले साल फरवरी में उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पैंक्रियाटिक बीमारी का पता चला। इसके बाद उनका इलाज अमेरिका में हुआ। अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने 19 जुलाई से 3 अगस्त, 2018 तक विधानसभा के मानसून सत्र में भाग लिया। उसके बाद एक बार चेकअप के अमेरिका गए। पिछले साल उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था।

नाक में नली लगाकर विधानसभा पहुंचे थे

सार्वजनकि जीवन के प्रति समर्पण के मिसाल भी थे मनोहर पर्रीकर। बीमारी के बावजूद उन्होंने ढाई महीने बाद इस साल दो जनवरी में अचानक मुख्यमंत्री दफ्तर पहुंचकर सबको हैरान कर दिया था। वह ठीक से चल नहीं पा रहे थे। नाक में नली लगी थी, लेकिन लोगों के लिए काम करने का उनका जज्बा कम नहीं हुआ था।

वह मंडोवी नदी पर बने तीसरे पुल के उद्घाटन समारोह में भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ मौजूद थे। यही नहीं 30 जनवरी को उन्होंने राज्य का बजट भी पेश किया था।

नाक में नली लगाए, बिना चप्पल के एक कर्मचारी की मदद से विधानसभा में आते हुए पर्रीकर की तस्वीर वायरल हुई थी। उनकी तबीयत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बजट पेश करने के अगले ही दिन उन्हें दिल्ली एम्स में एक बार फिर इलाज के लिए भर्ती कराया गया।

सीएम बनने वाले पहले आइआइटीयन

मनोहर पर्रीकर आइआइटी से पढ़ाई करने वाले पहले विधायक और मुख्यमंत्री भी थे। उन्होंने 1978 में बॉम्बे आइआइटी से मेटलर्जिकल ट्रेड से इंजीनियरिंग की डिग्र्री हासिल की।

आइआइटी से पढ़ाई के दौरान ही मनोहर पर्रीकर ने यह तय किया था कि वे मशीनों के बीच उलझने के बजाए सामाजिक क्षेत्र में काम करेंगे।

-- पर्रीकर के दो बेटे हैं पर्रीकर के दो बेटे हैं। एक उत्पल और दूसरा अभिजात पर्रीकर। उत्पल ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में यूएस की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। जबकि, अभिजात बिजनेसमैन हैं। उत्पल ने उमा सरदेसाई से प्रेम विवाह किया था।

उमा ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया से पढ़ाई की है। इनका एक बेटा है, जिसका नाम ध्रुव है। अभिजात पर्रीकर की शादी 2013 में हुई थी। उनकी पत्नी साई फार्मासिस्ट हैं।

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Makar Sankranti
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