पणजी। जीवटता से जीने वाले और शासन-प्रशासन में मिसाल कायम करने वाले मनोहर पर्रीकर की पहचान देश मे एक जुझारू और कद्दावर नेता के रूप में की जाती थी। भाजपा को गोवा में स्थापित करने का श्रेय मनोहर पर्रीकर को दिया जाता है।

उनके पार्टी को दिए बेमिसाल समर्पण को देखते हुए जब पीएम मोदी ने देश की सत्ता संभाली तो उन्होंने देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी मनोहर पर्रिकर को सौंपी।

कुछ समय बाद जब गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से दूर रही तो एक बार फिर से उनके कंधों पर गोवा में सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने भाजपा द्वारा सौंपे गए कार्य को बखूबी किया और गोवा में अल्पमत होने के बावजूद सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की।

मनोहर पर्रिकर का राजनीतिक सफर

मनोहर पर्रीकर ने गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ 14 मार्च 2017 को ली थी। इससे पहले भी वह 2000 से 2005 तक और 2012 से 2014 तक गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके थे। 2014 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार में रक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण किया।

मनोहर पर्रीकर ने समाजसेवा और देशसेवा का कहकहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सीखा और राजनीति की शुरूआत उन्होंने भाजपा से की थी।

उन्होंने पहला चुनाव 1994 में गोवा की पणजी सीट विधानसभा का लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस समय उन्होंने विपक्ष के नेता की भूमिका का निर्वाह किया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुढ़ कर नहीं देखा और भाजपा की सीटों में इजाफा करते हुए उसको सत्ता के शिखर पर लेकर गए।

साल 2000 में उनकी पत्नी का कैंसर से निधन हो गया, लिहाजा परिवार की जिम्मेदारी को भी उन्होंने काफी संजिदगी के साथ निभाया।

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