मुंबई। किसानों की बेहतरी को लेकर की जारी तमाम कोशिशों के सरकार लाख दावे करें लेकिन हकीकत हर बार इससे जुदा ही नजर आती है। देशभर में किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। अकेले महाराष्ट्र में ही पिछले चार सालों में 12 हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में साल 2015 से लेकर 2018 के बीच 12,021 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंत्री सुभाष देशमुख द्वारा शुक्रवार को सदन में लिखित में एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी गई है। इस जवाब के हिसाब से पिछले चार सालों में हर साल औसतन 3,005 किसानों ने आत्महत्या की है।

अपना जवाब देश करते हुए मंत्री देशमुख ने कहा कि 4 सालों में आत्महत्या करने वाले किसानों में से 6,888 किसान(लगभग 57 फीसदी) सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे के दायरे में थे। इनमें से 6,845 किसानों को एक लाख तक का मुआवजा दिया जा चुका है। उन्होंने सदन को ये भी जानकारी दी कि इस साल जनवरी से लेकर मार्च तक राज्य में 610 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 192 मुआवजे के दायरे में आ रहे थे।

देशमुख ने कहा कि किसानों को लोन वेबर देने का किया गया वादा सरकार निभाएगी। अब तक लोन वेबर स्कीम से 50 लाख किसान लाभान्वित हो चुके हैं। मैं किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनके साथ है। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे आत्महत्या ना करें।

बता दें कि देश में पिछले कई सालों में महाराष्ट्र के किसानों द्वारा सबसे ज्यादा आत्महत्या की गई हैं। पिछले चार सालों में तीन बार सूखे की मार ने किसानों की परेशानी को विकराल कर दिया है।

Posted By: Neeraj Vyas