मुंबई (मिड डे)। सरकारी अस्पतालों में असुविधाओं और गंदगी को लेकर लोग अक्सर परेशान दिखते हैं। इलाज करवाकर ठीक होने आए लोग और ज्यादा बीमार हो जाते हैं। ऐसा ही मामला मुंबई में सामने आया है जहां बीएमसी द्वारा चलाए जा रहे ‘शताब्‍दी अस्‍पताल’ में चूहों ने आतंक मचा रखा है।

आलम यह है कि यह चूहे अस्पताल में भर्ती मरीजों पर हमला करने लगे हैं। पिछले सप्ताह ही चूहों ने यहां भर्ती एक बुजुर्ग महिला की आंख खी ली वहीं एक अन्‍य मरीज महिला के पैर के अंगूठे को इन चूहों ने कुतर डाला।

नींद में सोए मरीज की कुतर गए आंख

अस्‍पताल के प्रबंधन विभाग ने प्रांगण के चारों ओर इन्‍हें पकड़ने के लिए पिंजड़े और जाल लगा रखा है लेकिन ये खूंखार चूहे न जाने कहां अपने बिल में छिपे बैठे हैं। मरीजों पर इस तरह के हमले सुबह-सुबह करीब 5.15 हुआ। उस वक्‍त 65 वर्षीय पीड़िता प्रमिला नेहरुलकर नींद में थीं। कुछ दिनों पहले पैरालाइसिस अटैक के बाद उन्‍हें यहां भर्ती किया गया था।

घटना के वक्‍त लेडीज वार्ड में प्रमिला के पास ही रुपेश की पत्‍नी सो रहीं थी और वे स्‍वयं बाहर सोए थे। प्रमिला के कराहने और चीख से इन सब की नींद खुली और यह देखकर चकित रह गए कि प्रमिला के एक आंख को चूहों ने काट डाला है। रुपेश ने बताया, ‘हालांकि पैरालिटिक अटैक के कारण मेरी मां बोल नहीं सकती थी लेकिन जब चूहों द्वारा उनपर हमला हुआ तब किसी तरह रोने की आवाज उनके गले से निकली जिससे मेरी पत्‍नी की नींद खुली।‘

सो रहे मरीजों पर चूहों का हमला

रुपेश ने आगे कहा, ‘इस घटना के 6 दिन हो गए और अभी तक अस्‍पताल की ओर से कीटनाशक तक का छिड़काव नहीं किया गया है। वे केवल चूहों को पकड़ने के लिए पिंजड़े ही लगा रहे हैं। जब मरीज सो रहे होते हैं तब उनपर चूहों की भागदौड़ जारी रहती है।‘ सोमवार सुबह भी एक ऐसी ही घटना घटी जब 75 वर्षीय शांताबेन जाधव सो रहीं थीं।

उनके पास सो रही उनकी बहु सविता जब नींद से जगी तब देखा की शांताबेन के पैर के अंगूठे को चूहों ने काट खाया है जिसकी वजह से निरंतर खून निकल रहा था। सविता ने बताया, ‘तुरंत मैंने नर्स को बताया जिन्‍होंने घाव को साफ कर ड्रेसिंग करने के बाद इंजेक्‍शन लगाया। हम उन्‍हें पेल्‍विक बोन के ऑपरेशन के लिए लाए थे लेकिन अस्‍पताल ने नयी मुसीबत दे दी।‘

अस्‍पताल की सफाई

शताब्‍दी अस्‍पताल का तीन माह पहले चार्ज लेने वाले सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रदीप आंग्रे ने कहा, ‘इस तरह के हमलों को रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा रही है। हमले 19 सितंबर को पेस्‍ट कंट्रोल अधिकारियों को 19 सितंबर को पत्र भेजा है और उन्‍होंने चूहों के अंदर आने और बाहर जाने के सभी प्‍वाइंट्स को सील कर दिया है। पिछले 20 दिनों में हमने इन्‍हें पकड़ने के लिए पिंजड़ों की संख्‍या भी बढ़ा दी है।

चूहों को मारने वाले जहर का उपयोग न करने की वजह उन्‍होंने वहां की फॉल्‍स सीलिंग बतायी। उन्‍होंने बताया, ‘यदि हम जहर का उपयोग करते हैं तो वे इस फॉल्‍स सीलिंग के ऊपर जाकर मरेंगे और वहां से इन्‍हें बाहर निकालने का तरीका हमें नहीं पता। इसलिए हम पिंजड़ों का प्रयोग कर रहे हैं। हमारी ओर से जितना संभव है उतना बेहतर कर रहे हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि कुछ गलती मरीजों की भी है। ‘वे खाना खाकर बेड के पास छोड़ सो जाते हैं जिसके कारण चूहों का वहां पहुंचना स्‍वभाविक है।‘