नई दिल्ली। पुराने पड़ते लड़ाकू विमानों की वजह से भारतीय वायु सेना को लगातार हादसों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को एक और मिग-27 विमान के जोधपुर में गिरने के साथ ही पिछले नौ साल के दौरान ऐसे हादसों की संख्या 94 हो गई।

यानी देश में हर साल लड़ाकू विमानों के औसतन दस हादसे हो रहे हैं। नए लड़ाकू विमानों के शामिल नहीं हो पाने की वजह से वायु सेना के लड़ाकू बेड़ों की तादाद भी घटते हुए महज 33 हो गई है। जबकि बेड़ों की स्वीकृत संख्या 42 है।

भारतीय वायु सेना को लंबे समय से सुस्त पड़ी खरीद की वजह से पुराने पड़ते मिग विमानों को ही उड़ाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस वजह से हादसों की संख्या भी काफी हैं। वर्ष 2007 से अब तक ऐसे कुल 94 हादसे हो चुके हैं।

इनमें सबसे ज्यादा वर्ष 2009-10 के दौरान 14 हादसे हुए। जबकि सबसे कम पांच हादसे वर्ष 2012-13 के दौरान हुए। हादसे का शिकार होने वाले विमानों में मिग 21, मिग 27, मिग 29 और जगुआर सहित विभिन्न तरह के लड़ाकू विमान शामिल हैं।

पिछले दिनों नईदुनिया के सहयोगी प्रकाशन दैनिक जागरण से बातचीत में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा कि जल्द ही पुराने पड़ रहे सभी मिग 21 और 27 विमानों को बेड़ों से बाहर कर उनकी जगह स्वदेशी तेजस विमानों को शामिल कर लिया जाएगा।

साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि फ्रांस के साथ चल रहे राफेल विमानों के सौदे में भी जून तक कीमत तय हो जाने की उम्मीद है। मिग 27 विमानों को सोवियत रूस के दौरान डिजाइन किया गया था और रूसी कंपनी से लाइसेंस लेकर इन्हें भारत में बनाया गया था।

तय स्वीकृति के मुताबिक भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू विमानों के 42 बेड़े होने चाहिएं, जबकि इस समय महज 33 बेड़े बचे हैं। बेहद पुराने हो गए मिग 21 विमानों के सभी बेड़े अगले साल तक वायु सेना की सेवा से हटा लिए जाएंगे। जबकि लगातार देरी की वजह से तेजस विमानों को बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया बहुत सुस्त है।

कुछ दिनों पहले वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल बीएस धनोआ कह चुके हैं कि अगर एक साथ चीन और पाकिस्तान से युद्ध करना पड़े तो उसके लिए वायु सेना तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में वायु सेना को कम से कम 45 बेड़ों की जरूरत होगी।