नवोदित सक्‍तावत, इंदौर। Winter solstice 2019 : अंतरिक्ष रहस्‍य और रोमांच से भरा है। यह अपने आप में ऐसा संसार है जिसमें नित नए खुलासे होते रहते हैं। कई जानकारियां तो ऐसी होती हैं जो हमें चौंका देती हैं। अब दिन और रात जैसी नियमित घटना को ही लीजिये। रात और दिन होना एक स्‍थायी सिलसिला है लेकिन 22 दिसंबर, रविवार को यह कुछ अलग होने वाला है। यह खगोलीय दृष्टि से खास रहेगा। संडे का दिन सबसे छोटा दिन होगा और रात सबसे लंबी। इसके बाद से ही सर्दी बढ़ जाएगी। यकीन ना आए तो खुद जांच लीजियेगा। ऐसा हर साल होता है। इसे शीतकालीन सक्रांति या विंटर सोल्‍सटाइस कहते हैं। आइये विस्‍तार से समझते हैं यह क्‍या होता है, क्‍यों होता है और कैसे काम करता है।

क्‍या होता है Winter solstice या शीतकालीन संक्रांति

शीतकालीन संक्रांति (Winter solstice) वह क्षण होता है जब पृथ्वी का सूर्य से दूर झुकाव अपने अधिकतम पर होता है और आकाश में सूर्य की अधिकतम ऊंचाई अपने निम्नतम स्तर पर होती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दिन मकर रेखा पृथ्‍वी के सर्वाधिक निकट होती है। इसी के चलते इस दिन की अवधि कम रहेगी। 22 दिसंबर को दिन जल्‍दी ढल जाएगा, जबकि रात लंबी रहेगी। खगोल विज्ञान की भाषा में इसे विंटर सोल्‍सटाइस अथवा दिसंबर दक्षिणायन कहा जाता है जो कि हर साल 21 या 22 दिसंबर को आता है। इस दिन के बाद से ही ठंड बढ़ जाती है। पृथ्‍वी के उत्तरी गोलार्ध में दिसंबर में (एक बार दिसंबर संक्रांति और मिडविन्टर भी कहा जाता है) और दक्षिणी गोलार्ध में जून में एक बार (जून संक्रांति भी कहा जाता है) एक वर्ष में दो बार शीतकालीन संक्रांति होती है। उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति का दिन वर्ष का सबसे छोटा दिन (सबसे कम दिन और सबसे लंबी रात वाला दिन) होता है और हर साल 20 दिसंबर से 23 दिसंबर के बीच होता है।

इसलिए होता है ऐसा

तकनीकी भाषा में समझें तो हमारी पृथ्‍वी नार्थ और साउथ दो पोल में विभाजित है। साल के अंत में 21 दिसंबर को सूर्य पृथ्‍वी के पास होता है और उसकी किरणें सीधे ही मकर रेखा पर होती हैं। चूंकि सूर्य पृथ्‍वी के निकट होता है इसलिए इसकी उपस्थिति महज 8 घंटों की ही रहती है।

जैसे ही शाम को सूर्य ढलता है तो वह रात सबसे लंबी रात होती है। यह 16 घंटे की रात होती है। यह एक नियमित खगोल घटना है जो कि एक निश्‍चित समय पर स्‍वत: घटित होती है। इस दिन के बाद से ही जाड़ा शबाब पर चढ़ता है। सूर्य का दक्षिणायन होना इसकी प्रमुख वजह है।

उधर दक्षिणी गोलार्ध में होंगे लंबे दिन

इस समय सूर्य मकर रेखा के उपर है, जिसके चलते दक्षिणी गोलार्ध में अभी गर्मी का मौसम है। उत्‍तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी न पड़ते हुए आड़ी पड़ने के चलते ही यहां ठंड का मौसम है।

दिसंबर दक्षिणायन के बाद से जाड़े का होता है आगाज़

समूचे विश्‍व में दक्षिणायन एक साथ होता है। उत्‍तरी गोलार्ध पर सूर्य का झुकाव 23.5 डिग्री होता है। इस कारण यह साल का सबसे छोटा दिन बन जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही जाड़े का भी आरंभ हो जाता है।

उज्‍जैन में 10 घंटे का दिन, 13 घंटे की रात

काल गणना के प्राचीन केंद्र उज्‍जैन में 22 दिसंबर को सूर्योदय 7 बजकर 4 मिनट और सूर्यास्‍त 5 बजकर 47 मिनट पर होगा। 22 दिसंबर को दिन की अवधि 10 घंटे 42 मिनट और रात की अवधि 13 घंटे 20 मिनट की होगी। 22 दिसंबर के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा।

देश के चारों महानगरों में सूर्योदय और सूर्यास्‍त

नई दिल्‍ली - सुबह 7 बजकर 09 मिनट, शाम 5 बजकर 29 मिनट, 10 घंटे 19 मिनट का दिन

मुंबई - सुबह 7 बजकर 7 मिनट, शाम 6 बजकर 6 मिनट, 10 घंटे 59 मिनट का दिन

कोलकाता - सुबह 6 बजकर 12 मिनट, शाम 4 बजकर 57 मिनट, 10 घंटे 45 मिनट का दिन

चेन्‍नई - सुबह 6 बजकर 26 मिनट, शाम 5 बजकर 47 मिनट, 11 घंटे 21 मिनट का दिन

मध्‍यप्रदेश के प्रमुख शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्‍त

भोपाल - सुबह 6 बजकर 57 मिनट, शाम 5 बजकर 39 मिनट, 10 घंटे 42 मिनट का दिन

इंदौर - सुबह 7 बजकर 2 मिनट, शाम 5 बजकर 47 मिनट, 10 घंटे 44 मिनट का दिन

जबलपुर - सुबह 6 बजकर 47 मिनट, शाम 5 बजकर 29 मिनट, 10 घंटे 42 मिनट का दिन

ग्‍वालियर - सुबह 7 बजे, शाम 5 बजकर 30 मिनट, 10 घंटे 29 मिनट का दिन

उज्‍जैन - सुबह 7 बजकर 3 मिनट, शाम 5 बजकर 46 मिनट, 10 घंटे 42 मिनट का दिन

रतलाम - सुबह 7 बजकर 7 मिनट, शाम 5 बजकर 49 मिनट, 10 घंटे 42 मिनट का दिन

मध्‍यप्रदेश में 13.30 घंटे की रात, 10.32 घंटे का दिन

मध्‍यप्रदेश में इस बार साढ़े तेरह घंटे की रात होगी जबकि दिन केवल 10 घंटे 32 मिनट का ही होगा। मध्‍यप्रदेश में 14 जिलों से कर्क रेखा गुज़रती है। इसलिए यहां दिन व रात की अवधि लगभग समान होगी। इन 14 जिलों में रतलाम, उज्जैन, आगर, राजगढ़, सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल शामिल हैं।

इस साल का हाल

इस वर्ष 22 दिसंबर 2019 को दक्षिणायन की घटना रविवार को होगी। इसे दिसंबर संक्रांति (शीतकालीन संक्रांति) भी कहते हैं। हालांकि CST यानी सेंट्रल स्‍टैंडर्ड टाइम के अनुसार इसका समय 21 दिसंबर को रात 10:19 बजे से शुरू हो जाएगा। 22 दिसंबर को सुबह 4:19 बजे यह यूनिवर्सल टाइम पर होगा। यह तब होता है जब हमारे आकाश पर सूर्य साल के अपने सबसे दूर दक्षिण बिंदु की ओर पहुंचता है। इस सोल्‍सटाइस पर उत्तरी गोलार्द्ध पर पूरे विश्‍व का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है।

भारत में 10 घंटे 59 मिनट का दिन रहेगा

भारत में यह 22 दिसंबर, 2019 रविवार को है। इस दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर होगा और सूर्यास्‍त शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। अनुमान के अनुसार यह दिन 10 घंटे, 59 मिनट और 01 सेकंड की अवधि का रहेगा। जहां तक दिन के उजाले की बात है, यह दिन जून संक्रांति की तुलना में 7 घंटे, 24 मिनट कम अवधि का रहेगा। भूमध्य रेखा के उत्तर में अधिकांश स्थानों पर, वर्ष का सबसे छोटा दिन इसी तिथि के आसपास होता है।

कहां कितनी अवधि का दिन

भारत की राजधानी दिल्‍ली में 10 घंटे, 59 मिनट का दिन रहेगा। चीन की राजधानी बीजिंग में दिन की अवधि 9 घंटा, 20 मिनट, न्‍यूयार्क में 9 घंटा, 15 मिनट , टोक्‍यो में 9 घंटा, 44 मिनट और लॉस एंजेलिस में 9 घंटे, 53 मिनट का दिन रहेगी।

(आंकड़े अनुमानित)

22 दिसंबर, 2019 रविवार को भारत में शीतकालीन संक्रांति

शीतकालीन संक्रांति का समय - सुबह 09:49 बजे

शीतकालीन संक्रांति सूर्योदय - प्रातः 07:07 बजे

शीतकालीन संक्रांति सूर्यास्त - सायं 06:06

शीतकालीन संक्रांति दिवस की अवधि - 10 घंटे 59 मिनट 01 सेकंड

शीतकालीन संक्रांति पिछला दिन अवधि - 10 घंटे 59 मिनट 02 सेकंड

शीतकालीन संक्रांति अगले दिन की अवधि - 10 घंटे 59 मिनट 02 सेकंड

क्‍या कहती है ज्‍योतिष गणना

ज्‍योतिष गणना के मुताबिक वर्ष में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य की स्थिति में परिवर्तन आता है। इन्‍हें उत्‍तरायण और दक्षिणायन कहा जाता है। ज्‍योतिष के अनुसार सूर्य, मकर, कुंभ, मीन, मिथुन, वृषभ और मेष राशि में भ्रमणशील रहता है। इसके पश्‍चात 21 जून से सूर्य दक्षिण गोलार्ध में विचरण करता है जिनमें वृश्चिक, धनु, सिंह, कन्‍या, तुलना, कर्क आदि राशियां होती हैं।

सोल्‍सटाइस solstice का ये है अर्थ

सोल्‍सटाइस शब्‍द की उत्‍पत्ति मूल रूप से लैटिन भाषा के शब्‍द सोलिस्‍ततियम से हुई है जिसका अभिप्राय होता है सूर्य का सीधा होना। साल में दो बार सूर्य लंबवत होता है।

ग्रीष्‍मकालीन और शीतकालीन संक्रांति

यह घटना साल में मुख्‍य रूप से दो बार होती है, इसलिए इसे समर सोल्‍सटाइस और विंटर सोल्‍सटाइस कहा जाता है। गर्मी के दिनों में इसे ग्रीष्‍मकालीन संक्रांति भी कहते हैं। यह 20 से 22 जून के बीच कभी भी हो सकता है। इसी तरह सर्दी के दिनों में यह 20 से 23 दिसंबर के बीच कभी भी घट सकता है।

क्‍यों भिन्‍न होती हैं तिथियां

अब यह सवाल उठना स्‍वाभाविक है कि ये तारीखें भिन्‍न क्‍यों होती हैं। असल में जून संक्रांति के साथ, दिसंबर संक्रांति की अलग-अलग तिथियां मुख्य रूप से कैलेंडर प्रणाली के कारण हैं। अधिकांश पश्चिमी देशों में उपयोग किए जाने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में एक सामान्य वर्ष में 365 दिन और एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं। Tropical Year जो कि मौसम चक्र (पृथ्वी से देखा जाता है) में उसी स्थिति में लौटने के लिए कैलेंडर वर्ष के लिए अलग है। Tropical Year लगभग 365.242199 दिन का होता है, लेकिन अन्य ग्रहों के प्रभाव के कारण वर्ष-दर-वर्ष बदलता रहता है। पृथ्वी की सटीक कक्षीय और दैनिक घूर्णी गति भी इन बदलती संक्रांति तिथियों में भी योगदान करती है।

संस्कृति के आईने में

दिसंबर संक्रांति ने प्राचीन काल से हमारे दिन तक दुनिया भर की संस्कृतियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां तक कि क्रिसमस जैसा पर्व भी दिसंबर संक्रांति के दायरे में आकर इससे निकटता से जुड़ा हुआ है। जून संक्रांति से जुड़े रीति-रिवाजों के साथ-साथ वसंत और शरद ऋतु से जुड़ी परंपराएं भी हैं।

फैक्‍ट फाइल :

  • 21, 22 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन रहता है। इसकी अवधि लगभग 8 घंटे की होती है।
  • इस दिन के बाद से ही सर्दी बढ़ती है।
  • इसी क्रम में 21 मार्च को दिन व रात समान अवधि के हो जाते हैं।
  • 21 जून को साल का सबसे लंबा दिन कहा जाता है।
  • -21 सितंबर को फिर से दिन व रात की अवधि एक समान हो जाती है। यह साल में दो बार होने वाली घटना

- कुछ समुदाय पारंपरिक रूप से इसका स्‍वागत करते हैं और कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।

- इस खगोलीय घटना के बाद ही पहाड़ी क्षेत्रों में हिमपात होने व ठंड चमकने की संभावना बढ़ जाती है।

- विंटर सोल्‍सटाइस के बाद ही क्रिसमस का त्‍योहार आता है, इसलिए इसका धार्मिक एवं सांस्‍कृतिक महत्‍व भी है। आस्‍ट्रेलिया में लोग नदी में स्‍नान कर इस दिन को मनाते हैं।

दुनिया में इन देशों में इस समय गर्मी

22 दिसंबर को सूर्य की किरणें मकर रेखा पर पड़ेंगी जिससे नार्थ पोल में तो सर्दी शुरू होगी लेकिन साउथ पोल में गर्मी पड़ेगी। इसका कारण ये है कि नार्थ पोल में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ेंगी जबकि साउथ में यह सीधी पड़ेंगी जिससे कि गरमी होगी। विश्‍व में आस्‍ट्रेलिया, न्‍यूज़ीलैंड, साउथ अफ्रीका, अर्जेंटाइना आदि देशों में गर्मी रहेगी। यां समर सोल्‍टाइस देखने को मिलेगा, जिसके चलते वहां सबसे लंबा दिन देखा जाएगा।

हर जगह के मान से होता है अलग समय

विंटर सोल्‍सटाइस का समय कहीं भी एक समान नहीं रहता है। स्‍थानों की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां के दिन व रात की लंबाई का समय भी बदलता जाता है। भारत में ही कर्क रेखा और मकर रेखा की स्थिति पूरे देश में एक जैसी नहीं है इसलिए सभी शहरों में दिन व रात का समय अलग-अलग दर्ज होता है।

वेधशाला में शंकु यंत्र से दिखाते हैं

विंटर सोल्‍सटाइस एक खगोलीय घटना है जो हर साल होती है। इसे यहां वेधशाला में दिखाए जाने की पूरी व्‍यवस्‍था रहती है। स्‍कूली बच्‍चों व इच्‍छुक लोगों को वेधशाला में लगे शंकु यंत्र के माध्‍यम से मकर रेखा की छाया दिखाई जाती है जो कि पूरे दिन बनी रहती है।

आरपी गुप्‍त, अधीक्षक, जीवाजीराव वेधशाला, उज्‍जैन

(स्‍त्रोत : इंटरनेट सर्च एवं उज्‍जैन वेधशाला अधीक्षक से चर्चा पर आधारित)

Posted By: Navodit Saktawat

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