26/11 Mumbai attack anniversary: साल 2008 में 26 नवंबर ही वो दिन था, जब समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत पर सबसे बड़ा आतंकी हमले को अंजाम दिया था। 29 नवंबर तक आतंकियों को सफाया करने का काम चला। 9 आतंकियों समेत कुल 175 लोग मारे गए। 300 से अधिक जख्मी हुए। अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था, जिस पर बकायदा कोर्ट केस चला और बाद में उसे फांसी दे दी गई। अब 13 साल बाद एक बार फिर Ajmal Kasab का नाम ट्रेंड कर रहा है। सवाल उठा है कि क्या पुलिस के पास Ajmal Kasab का मोबाइल था, जिसे गायब कर दिया गया। जानिए पूरा मामला

परमबीर सिंह पर लगा कसाब का फोन गायब करने का संगीन आरोप

Ajmal Kasab का मोबाइल फोन गायब करने का आरोप लगा है कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह पर।मुंबई पुलिस के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने गुरुवार को परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। सेवानिवृत्त मुंबई पुलिस सहायक पुलिस आयुक्त शमशेर खान पठान का कहना है कि 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान तत्कालीन डीआईजी एटीएस परम बीर सिंह ने अजमल आमिर कसाब के फोन को जब्त कर लिया था, लेकिन यह फोन कभी भी जांच या परीक्षण के लिए पेश नहीं किया गया।

एक इंटरव्यु में सेवानिवृत्त एसीपी ने कहा कि उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ पुष्टि की थी कि यह वही फोन था जिस पर कसाब को पाकिस्तानी आकाओं से निर्देश मिल रहे थे। इसमें हमले में शामिल पाकिस्तान के बैठे आकाओं की जानकारी हो सकती है। इसलिए यह राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है और इसलिए इस मामले की जांच की जानी चाहिए और आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। शमशेर खान पठान ने इस मामले में मुंबई पुलिस को चिट्ठी भी लिखी है।

Koo App

मुंबई 26/11 आतंकी हमले में काल-कवलित हुए सभी निर्दोष नागरिकों व माँ भारती की रक्षा हेतु बलिदान देने वाले समस्त वीर जवानों को भावपूर्ण नमन व विनम्र श्रद्धांजलि। हम सभी उनके शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। आइए, एकजुट होकर आतंकवाद को जड़ से मिटाने हेतु संकल्पित हों।

- Yogi Adityanath (@myogiadityanath) 26 Nov 2021

जयदीप बनर्जी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग ऐप Koo पर पोस्ट कर कहा कि अशोक चक्र विजेता असिस्टेंट सब इस्पेक्टर तुकाराम ओंबलेजी की वीरता को सलाम, जिन्होंने आतंकी अजमल कसाब के एके-47 से 40 गोलियां खाने के बाद भी उसे जिंदा पकड़ा था।

तारिक फतेह ने Koo पर पोस्ट कर कहा कि जब मुंबई जल रहा था, गृह सचिव और अन्य शीर्ष अधिकारी पाकिस्तान के आतिथ्य का आनंद लेने में व्यस्त थे। ये मुंबई हमले से जुड़े सबसे अहम खुलासे में से एक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इसे सामने आने में साढ़े सात साल लगे, बल्कि इसलिए भी कि इस बात का कोई पुख्ता स्पष्टीकरण नहीं है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने पाकिस्तान में रहने का विकल्प क्यों चुना।

वहीं, जितेंद्र वर्मा ने Koo पर पोस्ट कर कहा कि परमबीर सिंह ने कसाब का फोन लिया था। जिसे लौटाया नहीं।

Posted By: Arvind Dubey