पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में एक पत्रकार को एसएचओ राकेश कुमार के साथ जीआरपी कर्मियों के एक समूह ने कैमरे के सामने जमकर पीटा था। इस समूह को पत्रकार को बार-बार थप्पड़ मारते और पिटते हुए देखा गया जबकि वह उनके साथ बात करने की कोशिश करता दिखा।

बाद में, पत्रकार ने आरोप लगाया कि उस पर अत्याचार किया गया। एएनआई के मुताबिक एक समाचार चैनल से जुड़े पत्रकार ने कहा, 'वे सादे कपड़ों में थे। एक ने मेरे कैमरे को गिरा दिया। जब मैंने उसे उठाया तो उन्होंने मुझे गालियां दीं। मुझे बंद कर दिया गया, निर्वस्त्र किया गया और उन्होंने मेरे मुंह में पेशाब की।'

मंगलवार रात को धीमानपुरा में ट्रेन के पटरी से उतरने के वाकये को कवर करने के दौरान पत्रकार की कथित रूप से पिटाई की गई थी।

शामली में पत्रकार को कथित तौर पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) पुलिस स्टेशन में लाया गया और सलाखों के पीछे डाल दिया गया। उसे रातभर हिरासत में रखा गया, जबकि बुधवार सुबह उसे रिहा करने का आदेश जारी किया गया।

ट्विटर पर कई वीडियो चल रह हैं, पत्रकार को सलाखों के पीछे से अपनी आपबीती सुनाते हुए देखा जा सकता है जबकि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राकेश कुमार बाहर एक कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं और सभी आरोपों को खारिज कर देते हैं।

पत्रकार ने थाने पर विरोध कर रहे अपने सहयोगियों को बताया कि रेलवे पुलिस फोर्स पर की गई एक नेगेटिव स्टोरी के कारण उसे टारगेट किया गया।

यूपी डीजीपी, ओपी सिंह ने एसएचओ जीआरपी शामली राकेश कुमार और कॉन्स्टेबर संजय पवार को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया है। पुलिस ने कहा कि नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी जाएगी।