मल्टीमीडिया डेस्क। माना जा रहा था कि काम के बाद भेजी जाने वाली ई-मेल्‍स लोगों की उत्‍पादकता बढ़ाएगी। मगर, अब कर्मचारियों के स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके नकारात्‍मक असर साफ दिखने लगे हैं।

Lehigh University की लियूबा बेल्किन, वर्जीनिया टेक के विलियम बेकर और कोलोरेडो स्‍टेट यूनिवर्सिटी की समांथा ए. कॉनरॉय ने इस बारे में एक नया अध्‍ययन किया है।

उन्‍होंने संगठनों के काम के बाद भेजे जाने वाले ई-मेल एक्‍सपेक्‍टेशन और भावनात्‍मक थकान के बीच संबंध का पता किया है, जो परिवार और काम के बीच संतुलन में बाधक बनता है।

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इस अध्‍ययन के नतीजे बताते हैं कि आधुनिक वर्कप्‍लेस टेक्‍नोलॉजी कई कर्मचारियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जो वास्‍तव में उनकी मदद के लिए बनाए गए थे। 365 कर्मचारियों के डाटा का उपयोग करते हुए बेल्किन और उनके साथ‍ियों ने काम के बाद कर्मचारियों को भेजी गई ई-मेल्‍स पर संगठनों की उम्‍मीदों की भूमिका को देखा।

उन्‍होंने पाया कि कर्मचारियों की मानसिक स्थिति पर इसका नकारात्‍मक प्रभाव पड़ रहा है। इससे कर्मचारियों के काम और परिवार के संतुलन को बिगाड़ रहा है, जो उनके स्‍वास्‍थ्‍य और अच्‍छे होने के लिए बेहद जरूरी है।

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शोधकर्ताओं ने पाया कि ई-मेल को पढ़ने में लगा समय नहीं, बल्कि उसमें जो उम्‍मीदें कर्मचारियों से की जाती हैं, वे कर्मचारियों में थकान का अनुभव कराती हैं। अग्रिम तनाव और अनिश्‍िचतता के कारण कर्मचारी इससे अलगाव महसूस नहीं करत हैं और थकान को महसूस करते हैं।

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