पटना। बिहार में शराब के बाद अब खैनी (तंबाकू) के उत्पादन, बिक्री और सेवन पर रोक लगेगी। राज्य सरकार अब इसकी तैयारी में जुट गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर खैनी को फूड प्रोडक्ट की सूची में शामिल करने का अनुरोध किया है, ताकि इस रोक लगाई जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि हमने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) को पत्र लिखकर खैनी को फूड प्रोडक्ट में शामिल करने का अनुरोध किया है। इसके बाद बिहार सरकार खैनी के उत्पादन से लेकर खरीद-बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाएगी। सरकार ने खैनी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ले लिया है। इसके उत्पादन, व्यापार और सेवन पर रोक लगाने के लिए एफएसएसएआइ की खाद्य सूची में शामिल होना जरूरी है।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में तंबाकू सेवन में कमी आई है, लेकिन अभी भी 25.9 फीसद लोग तंबाकू से छुटकारा नहीं पा सके हैं। 23.7 फीसद लोग चबाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें 20.4 फीसद लोग खैनी के रूप में तंबाकू खाते हैं। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। तंबाकू कैंसर का सबसे बड़ा कारण है।

देश में 12 लाख लोगों की मौत की वजह है तंबाकू-

देश में हर साल तंबाकू खाने के कारण करीब 12 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें 80 फीसद से अधिक मुंह के कैंसर के मरीज होते हैं। तंबाकू खाने वाले हृदय रोग के मरीज भी बन जाते हैं।

बिहार में पान मसाला और गुटका पर है रोक-

पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य बिहार में नवंबर, 2014 से पान-मसाला, गुटका और जर्दा की खरीद- बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध है। फूड प्रोडक्ट की लिस्ट में शामिल नहीं होने के कारण खैनी प्रतिबंध के दायरे से बाहर रही।

फूड प्रोडक्ट में शामिल होने के बाद खैनी के उत्पादन, वितरण, बिक्री और सेवन पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा कानून के उस नियम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें कहा गया है कि किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू और निकोटिन की मात्रा नहीं होनी चाहिए।

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