AIIMS/ICMR कोविड19 नेशनल टास्क फोर्स/ज्वाइंट मॉनिटरिंग ग्रुप और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना रोगियों के मैनेजमेंट के लिए क्लिनिकल गाइडलाइन्स में बदलाव किया है और कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में शामिल प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया है। ICMR डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि कोरोना के इलाज की गाइडलाइंस में से प्लाज्मा थेरेपी को हटाए जाने को लेकर विचार चल रहा है। ICMR की नेशनल टास्क फोर्स इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक ICMR द्वारा की गई स्टडी में पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी मरीजों को फायदा पहुंचाने में नाकामयाब रही है। ये स्टडी देश के 39 अस्पतालों में की गई थी। अप्रैल में केंद्र सरकार ने भी कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी मरीज की जिंदगी को मुश्किल में भी डाल सकती है। उस वक्त इस थेरेपी को एक्सपेरिमेंटल बताया गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने तो इस थेरेपी को गैरकानूनी तक बताया था। उन्होंने कहा था कि जब तक ICMR की निरीक्षण टीम से संबंधित कोई व्यक्ति इलाज न देख रहा हो तब तक इस थेरेपी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ अब तक प्लाज्मा थेरेपी को कोविड ट्रीटमेंट के अंतिम उपाय के तौर पर देखा जा रहा था। कई राज्य गंभीर कोरोना मरीजों के इलाज में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ राज्यों ने कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का बड़ा रोल बताया है। दिल्ली सरकार ने तो कोरोना मरीजों की मदद के लिए प्लाज्मा बैंक को भी प्रमोट किया था। असम में भी प्लाज्मा डोनेट करने वालों को कई तरह की सुविधाएं देने की बात कही गई थी।

Posted By: Shailendra Kumar

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