नई दिल्‍ली। देश में बनाए जा रहे हवाई जहाजों को यदि इस साल भी हरी झंडी नहीं मिली तो भारतीय वायु सेना को दूसरे देशों से कुछ इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर्स की खरीदी करनी पड़ सकती है। इन ट्रेनर्स विमानों का इस्‍तेमाल पायलट प्रशिक्षण के दूसरे दौर में किया जाता है।

उल्‍लेखनीय है कि हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) 14 वर्षों से इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर्स का निर्माण कर रहा है। कंपनी को उम्‍मीद है कि वह इस वर्ष इनके निर्माण का काम पूरा कर लेगी। विमान निर्माण में कुछ तकनीकी समस्‍याएं आ रही हैं। ऐसे में भारतीय वायु सेना को उसकी जरूरत के 30 प्रतिशत विमानों को दूसरे देशों से खरीदने की अनुमति दी जा सकती है।

वायु सेना ने एचएएल को 73 जेट ट्रेनर्स का ऑर्डर दिया है। साथ ही वह एचएएल के विकास कार्यक्रम में भी उसकी मदद कर रही है। वायु सेना को जेट ट्रेनर्स मिलने की तिथि कई बार आगे बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में अब दूसरे देशों से 30 प्रतिशत जेट खरीदने के बारे में विचार किया जा रहा है।

वायु सेना में नए पायलट को प्रशिक्षण देने में उपयोग किए जाने वाले जेट ट्रेनर्स की संख्‍या बेहद कम है। वर्तमान में सेना प्रशिक्षण के कार्य में किरण एमके-1 और एमके-2 का उपयोग कर रही है। इन विमानों की देखरेख में वायु सेना को खासी मशक्‍कत करनी पड़ रही है।

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