नई दिल्ली। सरकार एयर इंडिया, एमटीएनएल और हिंदुस्तान शिपयार्ड समेत सार्वजनिक क्षेत्र की पांच कंपनियों (पीएसयू) को बंद करेगी। ये कंपनियां 65 बीमारू पीएसयू की लिस्ट में शामिल हैं। मंगलवार को लोकसभा में सरकार की तरफ से यह जानकारी दी गई।

भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने प्रश्नकाल के दौरान बताया कि जिन सरकारी कंपनियों को बंद करने की योजना है, उनके कर्मचारियों को बहुत आकर्षक वीआरएस (स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति) ऑफर किया जा रहा है। हालांकि गीते ने अन्य दो वैसी कंपनियों के नाम नहीं बताए जिन्हें बंद करने की योजना है।

एक जमाने में एयर इंडिया विमानन और एमटीएनएल मोबाइल टेलीफोनी सेक्टर की मार्केट लीडर थीं। लेकिन अब इन्हें बीमारू घोषित कर दिया गया है। कारण यह है कि लगातार चार साल से इन कंपनियों को औसम नेट वर्थ (निवल मूल्य) का 50 प्रतिशत या इससे ज्यादा घाटा उठाना पड़ रहा है। बहरहाल, गीते ने बताया कि पिछले साल 31 मार्च तक कुल मिलाकर 65 सरकारी कंपनियों को बीमारू घोषित किया जा चुका था।

लोकसभा में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक एयर इंडिया को 2013-14 के दौरान 5,490 करोड़ रुपए का, 2012-13 में 5,490 करोड़ रुपए का और 2011-12 में 7,559 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा था। साल 2013-14 के दौरान एमटीएनएल को 7,820 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था, लेकिन इससे पहले के दो वर्षों में कंपनी को क्रमशः 5,321 करोड़ रुपए और 4,109 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा था। हिंदुस्तान शिपयार्ड का घाटा भी इस दौरान क्रमशः 859 करोड़, 551 करोड़ और 462 करोड़ रुपए रहा था।

बंद करने के कारण

1. ये कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं और इन्हें बीमारू घोषित किया जा चुका है।

2. प्रतिस्पर्धा में लगातार पिछड़ रही हैं एयर इंडिया और एमटीएनएल जैसी कंपनियां।

कर्मचारियों का क्या

सरकार दावा कर रही है कि कर्मचारियों को बहुत आकर्षक वीआरएस ऑफर किया जा रहा है।

एयर इंडिया को बंद नहीं करना चाहिए, सरकार आसान रास्ता अपना रही है। कर्मचारियों को नुकसान होगा। जिन्होंने एयरलाइंस की हालत खराब की उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एयर इंडिया को बंद करना आसान नहीं होगा, इसके साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं।