गुरुदीप त्रिपाठी, प्रयागराज। भाषा पर किसी धर्म का विशेषाधिकार नहीं। इसे साबित कर रहा है पूरब के ऑक्सफोर्ड यानी इलाहाबाद विश्वविद्यालय का संस्कृत विभाग। यहां शिक्षा ले रहे चांद मुहम्मद और अब दिल्ली में शोध कर रहे इरफान वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे दौर में जब बनारस हिदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में फिरोज खान की बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति को लेकर विवाद काफी गर्माया है, इससे यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं कहीं न कहीं थोड़े व्यथित हैं। हालांकि उनका मानना है कि यह विवाद जल्द थम जाएगा। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में छह मुस्लिम विद्यार्थी फिलहाल वेद-उपनिषद और श्रीमद्भागवत गीता पढ़ रहे हैं। पूर्व में कुछ छात्र बाकायदा इस पर शोध कर चुके हैं। कुछ अब भी कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर राम सेवक दुबे बताते हैं कि विश्वविद्यालय के संस्कृत पाठ्यक्रम में श्रीमद्भागवत गीता, वेद, उपनिषद और महाकाव्य में शिशुपाल वध आदि शामिल हैं। मुस्लिम विद्यार्थियों को इसमें प्रवेश पर कोई रोक नहीं है।

विभागाध्यक्ष प्रो. उमाकांत यादव कहते हैं कि यहां से पढ़ाई कर चुके कई छात्र आज रिसर्च कर रहे हैं। करछना के सोनाई गांव निवासी चांद मुहम्मद एमए (संस्कृत) अंतिम वर्ष के छात्र हैं। कहते हैं विषय तो सभी के लिए है। बीएचयू में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर बेमतलब बखेड़ा हो रहा है। वह सवाल करते हैं कि मजहब के आधार पर भाषा का बंटवारा कैसे हो सकता है? बकौल चांद मुहम्मद वह छठवीं क्लास में ही माहेश्वर सूत्र सीख चुके थे। नई दिल्ली से उन्होंने शिक्षाशास्त्री की उपाधि ली। वह परिवार के इकलौते सदस्य हैं जो वेद-उपनिषद पढ़ रहे हैं। उनके जीवन का सूत्र वाक्य है वसुधैव कुटुंबकम। मो. तानिब, आवेश अहमद, अमजद अंसारी, गुलशन बानो और फहमिदा फरहीन भी विवि में संस्कृत पढ़ रहे हैं। 2012 में संस्कृत में परास्नातक कर चुके इरफान सिद्दीकी वर्तमान में दिल्ली विवि में आधुनिक संस्कृत पर रिसर्च कर रहे हैं। 2013 में परास्नातक करने वाले ताहिर अली इन दिनों दिल्ली में वेद और पुराण पर शोध कर रहे हैं।

प्रो. केजे नसरीन बनीं मिसाल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. किश्वर जबीं नसरीन की चर्चा आज भी होती है। उन्होंने जिस आत्मीयता से संस्कृत से नाता जोड़ा, वह अनुकरणीय है। उनकी बहन अफ्शा जबी सिनी का भी संस्कृत से बहुत लगाव है।

Posted By: Yogendra Sharma