नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में रविवार को एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को लेकर कई गलतफहमियां थी। कश्मीर को लेकर लोगों को कभी सच नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 ने ही कश्मीर को कभी भारत का हिस्सा नहीं बनने दिया।

गृहमंत्री ने कहा कि हम जानते हैं कि 1947 से कश्मीर चर्चा और विवाद का विषय रहा है, लेकिन लोगों के सामने गलत इतिहास पेश किया गया। जिन लोगों ने गलती की, उन्हीं के हाथों में इतिहास लिखने की जिम्मेदारी थी, लिहाजा सही तथ्यों को छिपाया गया। मुझे लगता है कि अब समय आ गया हैस जब इतिहास को सुधारा जाए और लोगों के सामने इसे लाया जाए।

कश्मीर में सूफी संतों को तबाह कर दिया गया, तब मानवाधिकारों की बात उठाने वाले लोग कहां थे? जब कश्मीरी पंडितों को बाहर निकाला गया, तो वे कहां थे? कश्मीरियों ने अनुच्छेद 370 की वजह से काफी सहा है।

अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का कोई फायदा नहीं हुआ है, बल्कि नुकसान ही हुआ है। सबसे बड़ा नुकसान हुआ है कि वहां भ्रष्टाचार हुआ। हर राज्य में एंटी करप्शन ब्यूरो है, लेकिन कश्मीर में ऐसा कोई ब्यूरो नहीं है क्योंकि उसके न होने से भ्रष्टाचार आसानी से हो सकता था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से कश्मीर को दो लाख 77 हजार करोड़ रुपए दिया गया, लेकिन वह पैसे कहां गए, जबकि किसी कश्मीरी के घर में ना तो बिजली पहुंची और न ही पानी पहुंचा।

उन्होंने कहा कि जनसंघ ने शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध किया था। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां और गलतफहमियां कश्मीर में आज भी फैली हुई हैं, उनका स्पष्ट होना जरूरी है। जितना यह कश्मीर की जनता के सामने स्पष्ट होनी जरूरी हैं, उतनी ही भारत की जनता में भी इनका स्पष्ट होना जरुरी है। शाह ने कहा कि जो लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि ये राजनीतिक स्टैंड है उनको मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये हमारा स्टैंड तब से है जब से मेरी पार्टी बनी।

शाह ने काह कि सबसे पहले जब देश आजाद होता है, तो उसके सामने सुरक्षा का सवाल, संविधान बनाने का सवाल आता है। मगर, हमारे सामने 630 रियासतों को एक करने का प्रश्न आ गया। देश में 630 अलग-अलग रियासतों को एक करना और अखंड भारत बनाना, ये हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती का काम था। आज मैं आदर के साथ देश के प्रथम गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को प्रणाम करके ये बात कहना चाहता हूं कि वह नहीं होते तो, ये काम कभी न होता।

शाह ने कहा कि सरदार पटेल की ही दृढ़ता का परिणाम था कि 630 रियासतें आज एक देश के रूप में दुनिया के सामने मौजूद हैं। 630 रियासतों को एक करने में कोई दिक्कत नहीं आई, लेकिन जम्मू-कश्मीर को अटूट रूप से अखंड रूप से एक करने में 5 अगस्त 2019 तक का समय लग गया। उन्होंने कहा कि गुजरात में 370 नहीं है, तो क्या वहां गरबा समाप्त हो गया क्या? बांग्ला में 370 नहीं है, तो क्या बंगाली भाषा खत्म हो गई है? उन्होंने कहा कि मैंने संसद के दोनों सदनों से पूछा कि कश्मीर को अनुच्छेद 370 से क्या मिला?

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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