नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल पांच जून तक केरल के तट पर दस्तक देगा। फिलवक्त वह धीरे-धीरे केरल की ओर आगे बढ़ रहा है। पिछले वर्ष यह छह जून को केरल पहुंचा था। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की पहली बारिश जोरदार होगी और उसके लिए अनुकूल स्थिति बनी हुई है। फिलहाल देश के कुछ भागों में मानसून पूर्व की वर्षा के आसार भी हैं।

कुछ वर्षों से लेट हो रहा

मानसून के केरल आने की सामान्य तिथि एक जून है, लेकिन यह कुछ वर्षों से लेट हो रहा है। मौसम विभाग ने पिछले वर्ष पांच जून को केरल पहुंचने का अनुमान जताया था, लेकिन यह छह जून को आया था।


चार माह तक रहता है सक्रिय

केरल में आने के बाद चार माह तक यह भारत में सक्रिय रहता है। हालांकि इसकी आधिकारिक अवधि एक जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। भारतीय मौसम विभाग के निदेशक बीपी यादव ने बताया कि मानसून की अनुकुल स्थिति बन रही है। पहली बारिश जोरदार होगी।

580 जिलों के लिए विशेष योजना

कृषि मंत्रालय ने देश के 580 जिलों में मानसून में विलंब के मद्देनजर उत्पन्न होने वाली स्थिति के लिए आपात योजना बनाई है। 15 जून तक मानसून आधे देश में व 15 जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। इसकी मदद से किसान धान, सोयाबीन, गन्ना व कपास आदि फसलों की बुआई करते हैं।

अल नीनो का खतरा

मौसम विभाग ने अप्रैल में आशंका जताई थी कि इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। मानसून पर अल नीनो इफेक्ट तब होता है जब प्रशांत महासागर की सतह के पानी का तापमान बढ़ जाता है और बादल बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे ऑस्ट्रेलिया व भारत जैसे देशों में सूखे की स्थिति बन जाती है।

कर्नाटक में पिछले 10 साल की सर्वाधिक मानसून पूर्व वर्षा

मानसून अभी केरल भी नहीं पहुंचा है, लेकिन इसके पहले ही बेंगलुरु में मानसून पूर्व 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। यह पिछले 10 साल की सर्वाधिक मानसून पूर्व वर्षा है। मौसम विभाग के अनुसार पूरे कर्नाटक में मानसून पूर्व की बारिश हो रही है। बेंगलुरु व आसपास के क्षेत्र में तो आंधी के साथ जोरदार बारिश हुई।

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