नई दिल्ली। भारतीय सेना के जोश, जज्बे और प्रतिबद्धता को सलाम करना होगा कि केरल में आई इस सदी की विनाशकारी जल प्रलय का सामना कर रहे नागरिकों को बचाने में वह रात-दिन जुटे रहे।

राहत और बचाव कार्य में थल सेना, नौसेना, वायु सेना, भारतीय तट रक्षक बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियों ने जिस निष्ठा, सतर्कता, मुस्तैदी से अपना कर्तव्य निभाया वह प्रशंसनीय है।

केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगभग 14 दिन तक चले 'ऑपरेशन मदद' के दौरान नौसेना के जवानों ने 16,005 लोगों की जिदंगी को बचाया है।

केरल के एर्नाकुलम में घर की छत पर हेलीकॉप्टर उतरना आसान नही था, लेकिन जवानों ने बुजुर्ग महिला को एयरलिफ्ट करके अस्पताल तक पहुंचाया।

खास बात यह है कि केरल में दस दिन के भीतर सेना ने राहत तथा बचाव कार्य के अलावा ऐसे कार्य भी किए हैं जो उसके सैनिकों को सच में फरिश्ता बनाते हैं। नौसेना के हेलीकॉप्टर ने बाढ़ में फंसी एक गर्भवती महिला को एयरलिफ्ट कर नौसेना के अस्पताल भेजा जहां उस महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया।

वहीं वायुसेना ने जिस तरह बेहद जटिल हालात में 26 लोगों को एयरलिफ्ट कर उन्हें बचाया। वह उनके शौर्य और पराक्रम को दर्शाता है। ऐसे ही और तमाम किस्से सेना की विश्वसनीयता और प्रतिबद्धता को बढ़ाते हैं। बाढ़ प्रभावित केरल में सेना के चलाए गये राहत और बचाव ऑपरेशन में युद्धस्तर पर काम किया गया है।

थलसेना की दस बाढ़ राहत टुकड़ियां, दस इंजीनियरिंग टास्क फोर्स, 60 नौकाएं, एयरफोर्स और नेवी के 38 हेलीकॉप्टर, 20 परिवहन विमान तथा कोस्ट गार्ड तथा एनडीआरएफ की समुचित संसाधनों भरी टीमों की तैनाती इस बात की ओर अंकित करती है कि सैन्य बलों के लिए सरहद की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा दोनों बराबर हैं। इस तबाही तथा मौसम की प्रतिकूलताओं के बीच वहां थल सेना, वायुसेना, नौसेना के जवानों ने किसी देवदूत की तरह ही अपनी भूमिका निभाई है।

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