नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई शुरू की।

जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाले पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन की दलीलों के साथ सुनवाई शुरू हुई। वह नौकरशाह से राजनेता बने शाह फैसल की ओर से पेश हुए। पीठ में जस्टिस एसके कौल, आर. सुभाष रेड्डी, बीआर गवई तथा सूर्यकांत भी शामिल हैं। रामचंद्रन ने पीठ के सामने इस केस में अपनी ओर से दी जाने वाली दलीलों की रूपरेखा पेश की। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति शासन के 'अस्थाई कवर" के इस्तेमाल से केंद्र और राज्यों के संबंधों को अपरिवर्तनीय रूप से बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वह इस बात पर भी बहस करेंगे कि क्या जम्मू-कश्मीर के लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की सहभागिता के बगैर ऐसा किया जा सकता है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में कई खास शख्सियतों, वकीलों, कार्यकर्ताओं तथा नेशनल कांफ्रेंस, सज्जाद लोन नीत जेएंडके पीपुल्स कांफ्रेंस तथा माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने याचिकाएं दाखिल की हुई हैं। कोर्ट ने 14 नवंबर को इन याचिकाओं पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इससे मामले के निस्तारण में देरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों को सुनकर एक साथ ही सारे मुद्दों का निपटारा करेगा।

Posted By: Yogendra Sharma

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