नवीन नवाज, श्रीनगर। कश्मीर में माहौल बदल रहा है। अब मस्जिदों में जिहादी नारे नहीं लगते। यहां सिर्फ खुदा की इबादत होती है। मस्जिद के लाउड स्पीकर से लोगों को भड़काने के एक-दो प्रयास हुए, लेकिन वहां मौजूद अन्य नमाजियों ने ऐसे तत्वों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

अब सिर्फ इबादत की बातें : IG कश्मीर रेंज रह चुके पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस बार मस्जिदों के लाउड स्पीकर जहर फैलाने का काम नहीं कर रहे हैं। अब लाउड स्पीकर पर लोगों से कहा जा रहा है कि वह शांति बनाए रखें और अगर कोई कोई दुकान खोलता है तो उसे तंग न करें।

कट्टरपंथी यह करते थे

कट्टरपंथी गिलानी हों या उदारवादी मीरवाईज मौलवी उमर फारुक या फिर यासीन मलिक, सभी अपनी मस्जिदों से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहे। आतंकी भी भाषण के माध्यम से लोगों को जिहाद के प्रति उकसाते रहे हैं। PDP ने भी मजहब का सहारा लेकर अपने एजेंडे को आगे ले जाने का प्रयास किया।

मस्जिदों का हो सकता था दुरुपयोग : केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 समाप्त करने के फैसले के बाद आशंका थी कि अलगाववादी मजहबी स्थलों से माहौल बिगाड़ने की साजिश रच सकते हैं। 1990 में कश्मीर में आतंकी हिंसा के शुरुआती दौर में राष्ट्र विरोधी तत्वों ने इसी तरह अपना एजेंडा चलाया थ। 2008, 2009, 2010 और 2016 के हिंसक प्रदर्शनों में भी मस्जिदों का दुरुपयोग सामने आया था।

Posted By: Navodit Saktawat

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