नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के संबंध में विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की वैधता को चुनौती और विभिन्न प्रतिबंधों के मामले भी शामिल हैं।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने घाटी में रह रहे अपने परिजनों का हाल-चाल जाने के लिए अदालत से अपने गृह राज्य में जाने की अनुमति मांगी है। इस मामले की सुनवाई भी यही पीठ सोमवार को करेगी।

याचिकाओं में

इसके अलावा, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस पार्टी ने भी राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य के पुनर्गठन के खिलाफ याचिका दायर की है। बाल अधिकार कार्यकर्ता एनाक्षी गांगुली और प्रोफेसर शांता सिन्हा ने जम्मू और कश्मीर में अवैध तरीके से बच्चों को बंधक बनाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है।

इसी तरह राज्यसभा सदस्य और एमडीएमके के संस्थापक वाइको की याचिका की भी सोमवार को ही सुनवाई होनी है। इसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को उपस्थित करने का केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश देने की अपील की है। अपनी याचिका में वाइको ने कहा है कि प्रशासन को फारुक अब्दुल्ला को 15 सितंबर को चेन्नई भेजने की इजाजत देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई के जन्मदिन पर एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक वार्षिक सम्मेलन में शामिल होंगे।

मीडिया पर लगे प्रतिबंधों पर भी होना है निर्णय

हाल ही में माकपा नेता सीताराम येचुरी ने भी सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी, ताकि वह अपनी पार्टी के बीमार सहयोगी मुहम्मद यूसुफ तारीगामी से मुलाकात कर सकें। यह याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने उन्हें तारिगामी से मिलने के लिए कश्मीर जाने की पहले ही इजाजत दे दी थी।

सर्वोच्च अदालत ने लेकिन उनकी यात्रा पर कुछ शर्ते लगाते हुए कहा था कि वह वापस लौटकर इस संबंध में रिपोर्ट दें। कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन ने भी मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।

Posted By: Navodit Saktawat

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