कोरोना संकट के दौरान जहां लोग पाई-पाई के लिए मोहताज हो रहे हैं, एक ऑटो रिक्शा चालक ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। उसने ऑटो में रह गए एक बैग को उसके असली मालिक तक पहुंचा दिया। बैग में सात लाख रुपये की नकदी और गहने थे।

मामला कुछ इस प्रकार है। पुणे के केशव नगर इलाके में विट्ठल मापारे के ऑटो रिक्शा में एक दंपती सवार हुआ और हदपासार बस स्टैंड के पास उतर गया। ऑटो से उतरते समय वे अपना बैग उसी में भूल गए।

मापारे भी उनसे पैसा लिए और आगे बढ़ गया। जब वो चाय पीने के लिए एक दुकान पर रूका तो ऑटो में पीछे की सीट पर रखे बैग पर उसकी नजर पड़ी। वह बैग को बिना खोले उसे लेकर पास की घोरापड़ी पुलिस चौकी पर पहुंच गया। वहां सब इंस्पेक्टर विजय कदम मिले और उसने वो बैग उन्हें सौंप दिया।

कदम ने बताया कि उन्होंने जब बैग खोलकर देखा तो उसमें 20 हजार रुपये नकद, 11 तोला सोने के गहने और कुछ कपड़े मिले। कुल मिलाकर सात लाख रुपये के सामान थे। चूंकि दंपती ऑटो से हदपासार क्षेत्र में उतर गए थे, इसलिए उन्होंने वहां के थाने से संपर्क किया। पता चला कि दंपती महबूब और शहनाज शेख ने वहां अपना बैग खो जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।

मुंढवा थाने में दंपती को बैग सौंप दिया गया। पुलिस उपायुक्त सुहास बावाचे ने ऑटो चालक मापारे की ईमानदारी की जमकर सराहना की। इस घटना के बाद कई लोग उसकी तारीफ कर रह हैं। मापारे भी खुश है। उसका कहना है कि पिछले दो दिनों से लोग उससे बात कर रहे हैं और उसकी सराहना कर रहे हैं। उसके लिए इससे बढ़कर कोई इनाम नहीं है।

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Posted By: Navodit Saktawat

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