नई दिल्ली। अयोध्या केस की सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इस बीच, मुस्लिम और हिंदू पक्ष की ओर से बयानबाजी जारी है। शुक्रवार को पहले मुस्लिम पक्षकारों ने अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद में बयान जारी कर उन रिपोर्टों पर हैरानी जताई, जिनमें सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा केस में अपने दावे को वापस लेने की बात कही गई है। एक प्रमुख मुस्लिम पक्षकार एम. सिद्दिक के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को छोड़कर सभी मुस्लिम पक्षकारों ने समझौते को खारिज कर दिया है, क्योंकि मध्यस्थता के जरिए विवाद के समाधान की प्रक्रिया में मुख्य हिंदू पक्षकार शामिल ही नहीं हुए। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी कहा कि अब सुलह-समझौते में दिलचस्पी नहीं है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड को छोड़कर मुस्लिम पक्षकारों ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल के समझौता प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं।

मालूम हो कि 16 अक्टूबर को जब प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने अयोध्या मामले में 40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया, उसी दिन मध्यस्थता पैनल ने भी कोर्ट को अपनीरिपोर्ट सौंपी थी।

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की सीलबंद रिपोर्ट में हिंदू तथा मुस्लिम पक्षकारों के बीच 'किसी समझौते' की बात है। सूत्रों के मुताबिक, सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति तथा कुछ अन्य हिंदू पक्षकार समझौते के पक्ष में हैं। यह भी कहा जा रहा है कि समझौते के तहत सुन्नी वक्फ बोर्ड केस वापस लेने को राजी है, लेकिन मुस्लिम पक्षकारों की ओर पांच वकीलों द्वारा जारी एक बयान में मध्यस्थता पैनल के सदस्य श्रीराम पंचू तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी की ओर साजिश का इशारा किया है।

वकीलों ने कहा है कि प्रेस को लीक हुई बातें या तो सीधे तौर पर मध्यस्थता पैनल से प्रेरित है या मध्यस्थता प्रक्रिया में सहभागियों से। इस प्रकार का लीक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है, जिसने मध्यस्थता प्रक्रिया को गोपनीय रखने का निर्देश दिया था। इन वकीलों में सुन्नी वक्फ बोर्ड के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड शकील अहमद भी शामिल हैं।

Posted By: Arvind Dubey