मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। अयोध्‍या रामजन्‍मभूमि के बहुचर्चित मामले में आज सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। बड़े मामले का फैसला आकार में भी बड़ा है। यह फैसला पूरे 1 हजार 45 पेजों का है। वैसे तो यह फैसला सुनाने वाले पांच जज थे लेकिन यह फैसला किस जज ने लिखवाया है, उनके नाम का खुलासा नहीं है। ऐसा पहली बार ही हुआ है कि फैसले में जज का नाम नहीं है। अदालत के फैसलों के लिए स्‍थापित नियम तो यही चला आ रहा है कि फैसले के अंत में संबंधित जज का नाम दिया जाता है। अयोध्‍या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच द्वारा की गई थी। इनमें भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े (CJI-designate), जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्‍दुल नजी़र शामिल थे।

फैसले के बारे में एक और रोचक बात है कि इसमें 116 पेजों का एक परिशिष्‍ट शामिल किया गया है जो हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार यह स्‍पष्‍ट करते हुए बताता है कि क्‍यों विवादित स्‍थल भगवान राम का जन्‍मस्‍थान है। यह परिशिष्‍ट किसने बनाया, किसने तैयार किया, इसे किसने लिखा है, यह भी एक राज ही है। इसके लेखक के नाम का भी खुलासा नहीं है। पेज नंबर 929 पर फैसले का अंतिम पैरा है। इसमें कहा गया है कि, "उपरोक्‍त कारणों और दिशा से सहमत होते हुए हममें से एक ने अलग कारण दर्ज किए हैं, क्‍या विवादित ढांचा हिंदू धर्म की धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान राम का जन्‍म स्‍थान है।"

Posted By: Navodit Saktawat