नई दिल्ली। अयोध्या केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाी पूरी हो गई है। अब पांच जजों की संवैधानिक पीठ फैसला लिखेगी जिसे 17 नवंबर तक सुनाया जाना है। सुनवाई के अंतिम दिन बुधवार को हिंदू पक्ष रामलला के वकील सीए वैद्यनाथन ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड व अन्य मुस्लिम पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि विवादित स्थल पर मुगल शासक बाबर ने मस्जिद बनवाई थी। अन्य प्रमुख दलीलें इस प्रकार हैं :

- मुस्लिम पक्ष का दावा था कि वहां बाबर ने सरकारी जमीन पर मस्जिद बनाई थी, लेकिन यह जमीन सरकारी थी, वह साबित नहीं कर सके हैं।

- यदि मुस्लिम पक्ष यह दावा करते हैं कि एडवर्स पजेशन (कब्जे) के आधार पर उनका जमीन पर हक है तो हमें यह मानना होगा कि भगवान या मंदिर उस जमीन का पहले से असली मालिक थे।

- अयोध्या में मुस्लिमों की नमाज के कई स्थान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए भगवान राम का जन्मस्थान एक ही है और वह बदला नहीं जा सकता।

- गोपाल सिंह विशारद पक्ष के वकील रंजीत सिंह ने कहा कि विवादित स्थल का फैसला मुस्लिमों के विश्वास के आधार पर नहीं हो सकता।

14 अपीलों पर करना है फैसला

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के वर्ष 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों के माध्यम से पहुंचा है। हाई कोर्ट ने इसदीवानी मामले का फैसला करते हुए अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन तीनों पक्षकारों-सुन्नाी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा व रामलला विराजमान के बीच बराबर-बराबर भाग में बांटने का आदेश दिया था।

पहले केस 1950 में दायर हुआ था

अयोध्या मामले में कानूनी विवाद की शुरूआत 1950 में गोपाल सिंह विशारद द्वारा निचली कोर्ट में पहला केस दायर करने के साथ हुई थी। वह रामलला के भक्त थे और उन्होंने विवादित जगह हिंदुओं को पूजा की इजाजत देने की मांग की थी। इसके समेत कुल पांच मामले दायर किए गए थे।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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