लखनऊ। अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम दौर की सुनवाई जारी है। नवंबर में फैसला सुनाया जाना है। इस बीच, गुरुवार को मुस्लिम बुद्धिजीवी इंडियन मुस्लिम फॉर पीस संस्था के बैनर तले लखनऊ में जमा हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे अयोध्या विवाद का हल कोर्ट से बाहर चाहते हैं। इससे दोनों पक्षों की विजय होगी। इन बुद्धिजीवियों ने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट से केस जीत भी जाता है तो उसे जमीन हिंदुओं को दे देना चाहिए। इन मुस्लिम बुद्धिजीवियों में डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी अफसर, शिक्षाविद्, रिटायर्ड जज शामिल थे। यहां एक संकल्प पत्र पास कर सुन्नी वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भेजने का फैसला भी हुआ।

पढ़िए किसने क्या कहा

'लड़ने से केवल नुकसान होता है, फायदा नहीं। अयोध्या विवाद का हल कोर्ट से बाहर होना चाहिए। अभी जो हालात हैं, उसमें मुसलमान वहां मस्जिद नहीं बना पाएंगे। इसलिए भूमि हिंदुओं को दे देनी चाहिए।'- रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल तथा एएमयू के पूर्व कुलपति जमीरुद्दीन शाह

'पूरा विवाद राजनीतिक और धार्मिक नेताओं का है। धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाया जा रहा है। दंगों में आम लोग जान गंवाते हैं, बड़े सुरक्षित रहते हैं। अदालत का जो भी फैसला आए, उसका असर अपनी जिंगदी पर न पड़ने दें।' - सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी निसार अहमद

'यह जमीन मुस्लिम समाज के पास है जिसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के जरिए सरकार को लौटा देना चाहिए। इसकी जगह कहीं और मस्जिद बनाने के लिए जमीन दी जाना चाहिए।' - रिटायर्ड आईएएस अफसर अनीस अंसारी

'हम सुन्नी वक्फ बोर्ड के लगातार संपर्क में हैं। क्योंकि अब वहां मस्जिद नहीं है, इसलिए जमीन की अदला-बदली हो सकती है।' - कार्यक्रम के सह संयोजक रिटायर्ड जज बीडी नकवी

बैठक में हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. मंसूर हसन, पूर्व मंत्री मोइद अहमद, रिटायर्ड आईपीएस वीएन राय सहित अन्य ने अपने विचार रखें।

अयोध्या पर मंजूर होगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इस बीच, सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े मरकज (केंद्र) दरगाह आला हजरत ने अयोध्या मुद्दे पर अपना मत साफ कर दिया है। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी का कहना है कि इस मामले में सर्वोच्च अदालत का जो फैसला आएगा, वह उन्हें मान्य होगा। गुरुवार को उन्होंने 23 अक्टूबर से शुरू हो रहे 101वें सालाना उर्स-ए-रजवी को लेकर हुई बैठक के बाद यह बात कही।