लखनऊ। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब पांच जजों की संवैधानिक पीठ फैसला लिखेगा, जिसे 17 नवंबर से पहले सुनाया जाना चाहिए। इस बीच, सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से बड़ा खुलासा हुआ है। बुधवार को खबर आई थी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे में अपना दावा छोड़ दिया है। हालांकि बोर्ड ने इसका खंडन कर दिया, लेकिन बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारुकी ने गुरुवार को कहा कि बोर्ड ने मध्यस्थता पैनल को जरूर समझौते का एक प्रस्ताव दिया गया है। चूंकि 18 सितंबर 2019 के सर्वोच्च अदालत के आदेश के तहत इसे गोपनीय रखा जाना है, इसलिए समझौते से जुड़ी बातों को अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।

सुनवाई के सिलसिले में अब तक दिल्ली में रह रहे फारुकी गुरुवार को लखनऊ लौट आए। उन्होंने 'दैनिक जागरण' से चर्चा में कहा, मुझे नहीं पता कि सुनवाई के आखिरी दिन बोर्ड द्वारा दावा वापस लेने की बात कहां से आई? यह महज अफवाह है।'

'सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि सभी पक्षकार चाहते हैं तो मध्यस्थता पैनल को समझौते का प्रस्ताव दे सकते हैं, तो इसी के तहत मैंने व कुछ और पक्षकारों ने आपसी सुलह का यह प्रस्ताव दिया है।'

'मैं मानने को राजी नहीं हूं कि सुनवाई के आखिरी दिन मध्यस्थता पैनल को समझौते का कोई प्रस्ताव दिया गया। कोई भी ऐसा कैसे कह सकता है।'

जब पूछा गया, ऐसी चर्चा है कि अयोध्या केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्यों को भी बोर्ड के बड़े फैसलों की कोई जानकारी नहीं होती, तो फारुकी का जवाब था 'वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मसले पर सभी अधिकार अध्यक्ष को दिए हैं। बोर्ड में बहुमत के साथ यह फैसला हुआ था। कोर्ट में बोर्ड की तरफ से दलीलें रखने से लेकर मध्यस्थता पैनल से अधिकार मेरे पास था। बोर्ड में दो सदस्य ऐसे रहे जो कभी बैठक में नहीं आए, केवल उन्हें ही इस मसले पर आपत्ति है। शेष सभी सदस्य हमारे साथ हैं।

आखिरी में फारुकी ने कहा कि सालों से चले आ रहे इस फैसले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला होगा वह हमें स्वीकार्य होगा।

Posted By: Arvind Dubey