लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को दावा किया कि देश में 99 प्रतिशत मुस्लिम चाहते हैं कि अयोध्या मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पूर्व में कह चुका है कि पुनर्विचार याचिका 9 दिसंबर तक दाखिल की जाएगी। जबकि वह मामले में पक्षकार नहीं है। मुस्लम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि मुस्लिम न्यायपालिका में यकीन करते हैं इसलिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा रही है। हालांकि अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत मुस्लिम पुनर्विचार याचिका के पक्ष में हैं। अगर यह समझा गया है कि मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग पुनर्विचार याचिका के खिलाफ है तो यह गलत है। हालांकि रहमानी ने यह संदेह भी जताया कि उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाएगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करें। यह उनका कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई विरोधाभासी बातें हैं।

आम मुसलमान नहीं है याचिका पक्ष में

पिछले दिनों राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के अध्यक्ष गयूरुल हसन रिजवी ने अध्यक्ष ने कहा था कि देश का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि जो मसला निपट गया है उसे फिर से उठाया जाए और समुदाय उन बातों पड़े। इसलिए सवाल यह है कि आप याचिका किसके लिए दाखिल कर रहे हैं? क्या आप समुदायों के बीच भाईचारा को नुकसान पहुंचाने के लिए याचिका दाखिल कर रहे हैं? या, निजी संतुष्टि के के लिए ऐसा कर रहे हैं?

उन्होंने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा असदुद्दीन ओवैसी समेत सिर्फ चार-पांच सदस्य ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के पक्ष में हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ओवैसी मुस्लिमों का इस्तेमाल कर राजनीति कर रहे हैं और ऐसे मुद्दों पर वोट पाना चाहते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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