नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घड़ी जैसे-जैसे पास आती जा रही है वैसे-वैसे दोनों ही पक्षों और उनसे जुड़े लोगों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। जहां एक तरफ यूपी के अयोध्या समेत अन्य स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है वहीं कुछ राज्यों ने भी एहतियातन कदम उठाए हैं। दूसरी तरफ सरकार भी फैसले को लेकर सतर्क है और लगातार लोगों से अपील कर रही है कि फैसला जो भी हो वो इसे लेकर संयम बरतें। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपील की कि फैसले को लेकर किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें। प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों से इस मुद्दे पर बेवजह बयानबाजी से बचने और देश में सौहार्द बनाये रखने की अपील की है।

पीएम मोदी ने बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में कहा कि अदालत के फैसले की उम्मीद है और इसलिए देश में सौहार्द बनाए रखने और इस मुद्दे पर बयानबाजी से बचने की हर किसी की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले 27 अक्टूबर को मन की बात कार्यक्रम में भी इसका जिक्र किया था और कहा था कि कैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकारों, राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटीज ने माहौल बिगड़ने से रोका था। उन्होंने इस दौरान कहा था कि कैसे एक आवाज से देश को मजबूत बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले पर आने वाले फैसले को जीत या हार की तरह ना देखा जाए। प्रधानमंत्री की इस नसीहत के अलावा पार्टी ने अपने सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्रों में भी दौरा करने के लिए कहा है ताकि शांति बनाई रखी जा सके। माना जा रहा है कि 17 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले शीर्ष अदालत अयोध्या पर फैसला सुना सकती है।

Posted By: Ajay Barve