नई दिल्ली। आज का दिन दुनिया के इतिहास में यादगार था वहीं अब देश के इतिहास में भी यादगार हो गया। जहां एक तरफ अनेकता पर एकता की जीत बर्लिन की दीवार गिराए जाने की बरसी थी वहीं देश के दशकों पुराने अयोध्या राम मंदिर और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर फैसला आ गया। इस फैसले से ना तो किसी की जीत हुई ना किसी की हार। बर्लिन की दीवार ने 28 सालों तक पश्चिमी बर्लिन और जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य को दो हिस्सों में बांटे रखा और इसके गिरने पर सभी ने खुशी मनाई थी। वहीं भारत में दशकों से विवाद का मुद्दा रहे राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन केस में आए फैसले ने सभी को खुश होने का मौका दिया है। आज ही के दिन भारत और पाक के बीच भी सीमाएं खुली हैं और करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ है।

हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या केस को लेकर आए फैसले से नाखुशी जताई है लेकिन मामले में मुद्दई रहे दिवंगत हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि हम इसका सम्मान करते हैं। देश के सबसे बड़े और धार्मक भावनाओं के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले मुद्दे पर जो फैसला आया वो बेहद ही शांतिपूर्ण तरीके से आया और दोनों ही पक्षों ने सद्भावना की मिसाल पेश करते हुए इसे मंजूर भी किया।

हालांकि, अब तक देश में शांति है इसके बावजूद सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और किसी भी स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है। लेकिन आज का दिन शायद विवादों पर प्यार, भाई चारे और इंसानियत की जीत का दिन था। यह एक संयोग ही था कि जिस दिन बर्लिन की दीवार गिरी थी उसी दिन जहां एक तरफ कोर्ट में मंदिर और मस्जिद के जमीन विवाद पर फैसला आ रहा था वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी दुनिया का शांति और प्रेम का संदेश देने वाले सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के मौके पर पाकिस्तान में स्थित करतारपुर गुरुद्वारा के लिए बने कॉरिडोर का उद्घाटन करने डेरा बाबा नानक में मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में बड़ी उपलब्धियां

यह बेहतर नेतृत्व क्षमता ही कही जाएगी कि मोदी सरकार के कार्यकाल में दशकों पुराने मामले में सौहार्दपूर्ण माहौल में फैसला आ गया वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी करतारपुर साहिब के लिए रास्ता देना पड़ा। अब तक सिख धर्म के श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब जाने के लिए पाकिस्तान का वीजा लेकर जाना पड़ता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। श्रद्धालु वैलिड पासपोर्ट की मदद से कभी भी करतारपुर गुरुद्वारे जाकर दर्शन कर सकेंगे। प्रधानमंत्री ने आज डेरा बाबा नानक में इस कॉरिडोर के लिए इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्घाटन किया।

इस कॉरिडोर का प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फरवरी 1999 में पाकिस्तान के सामने रखा था। इसके बाद पिछले साल दोनों देशों के बीच इस कॉरिडोर को लेकर चर्चा फिर गर्म हुई और मोदी सरकार ने नवंबर 2018 में भारत से पाकिस्तान के करतारपुर गुरुद्वारे के बीच कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव पास किया। एक साल में लगातार काम करते हुए इस कॉरिडोर को तैयार कर लिया गया है और आज इसका उद्घाटन भी हो गया।

जहां प्रधानमंत्री इस कॉरिडोर का उद्घाटन कर रहे थे वहीं सर्वोच्च न्यायालय दशकों पुराने अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर तथ्यों के आधार पर अपना फैसला सुना रहा था। अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलों और पेश किए सबूतों के अधार पर फैसला सुनाया और जहां विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना वहीं मस्जिद के लिए अलग 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।

आज ही टूटी थी बर्लिन की दीवार

जर्मनी के बीच बनी बर्लिन की दीवार के टूटने को इतिहास का बड़ा मौका माना जाता है। 9 नवंबर को ही इस दीवार को गिरा दिया गया था। आज उसे 30 साल हो गए हैं। बर्लिन की दीवार पश्चिमी बर्लिन और जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच एक अवरोध थी जिसने 28 साल तक बर्लिन शहर को पूर्वी और पश्चिमी टुकड़ों में विभाजित करके रखा। इसका निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरु हुआ और 9 नवम्बर, 1989 के बाद के सप्ताहों में इसे तोड़ दिया गया। बर्लिन की दीवार अन्दरुनी जर्मन सीमा का सबसे प्रमुख भाग थी और शीत युद्ध का प्रमुख प्रतीक थी।

देश और दुनिया में दिया शांति और सौहार्द का संदेश

आज के दिन भारत में जो भी घटनाक्रम हुए वो महज एक संयोग ही थे लेकिन इस दौरान देश की जनता ने संयम बरतते हुए देश और दुनिया में शांति और सौहार्द का ही संदेश दिया है। बेहद संवेदनशील माने जाने वाले मामले में फैसले से पहले सरकार की तैयारियां मजबूत रही और खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की थी कि फैसला चाहे जो भी हो, कोई भी इसे जीत या हार के तौर पर ना देखे।

Posted By: Ajay Barve