Ayodhya Judgement Review Petition : अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है, लेकिन अब तक सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni waqf board) और अन्य मुस्लिम पक्षों के वकील रहे राजीव धवन का नाम कहीं नहीं आया। अब साफ हुआ है कि मुस्लिम पक्षों ने राजीव धवन की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है। मंगलवार सुबह खुद राजीव धवन ने यह खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जमीयत ने एजाज मकबूल के जरिए याचिका दायर करवाई है। जमीयत को अधिकार है कि वे किसी अपना वकील चुनते हैं। अब मैं रिव्यू पीटिशन में नहीं हूं, लेकिन मौलाना महमूद मदनी के इस बयान से खुश नहीं हूं जिसमें उन्होंने कहा है कि राजीव धवन की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए उनकी सेवाएं नहीं ली जा रही हैं। यह बकवास है।

बता दें, अयोध्या केस में राजीव धवन शुरू से मुस्लिम पक्ष के वकील रहे हैं। इस दौरान वे कई बार चर्चा में रहें। आखिरी दिनों में उस समय उनका विरोध तब शुरू हुआ जब राम मंदिर पर हिंदू पक्ष द्वारा पेश किया गया नक्शा उन्होंने फाड़ दिया था। देशभर में उनका विरोध हुआ था और पुलते फूंके गए थे।

जनवरी 2019 की एक सुनवाई में उन्होंने संवैधानिक पीठ में जस्टिस यूयू ललित को शामिल किए जाने पर सवाल उठा दिया था। उन्होंने कहा था- जस्टिस ललित 1994 में राम मंदिर से जुड़े केस में ही भाजपा नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए बतौर वकील कोर्ट में पेश हुए थे। इसके बाद केस की सुनवाई टल गई थी।

Posted By: Arvind Dubey