Ayodhya Verdict 2019 Supreme Court Live: अयोध्या केस को लेकर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाने की शुरुआत कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 से यह फैसला सुनाया जा रहा है। अमूमन सर्वोच्च अदालत में शनिवार को अवकाश रहता है, लेकिन इस केस का फैसला सुनाने ले लिए यह विशेष कोर्ट लगी है। फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में शामिल हैं- चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़। फिलहाल बारी-बारी से अपना फैसला पढ़ना शुरू किया जा चुका है। सबसे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कोर्ट में मौजूद लोगों को बताएंगे कि फैसला किस तरह पढ़ा जाएगा? साथ ही यह भी कि फैसला सर्वसम्मति से आएगा या बहुमत से। संभव है कि सभी जज अपना-अपना फैसला पढ़ें। हर किसी के पास कई 100 पेजों का फैसला होगा, लेकिन उसका ऑपरेटिव पार्ट ही पढ़ा जाएगा। ऐसा हुआ तो हर जज को 30 से 40 मिनट लगेंगे। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी हर अपडेट -

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- सुप्रीम कोर्ट ने कहा विवादित जमीन रामलला की है।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा 3 महीनें में केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के नियम बनाए। ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण कराया जाए।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा सुन्नी बोर्ड को वैकल्पिक जमीन देना जरुरी है। बोर्ड को 5 एकड़ जमीन कहीं और दी जाए।

- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा जमीन के तीन हिस्से किए जाने को सही नहीं माना है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन पक्षकारों के बजाय सिर्फ दो को ही पक्षकार माना है।

- पुरातत्व सबूतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के वृत्तांत और पुरात्विक सबूत हिंदूओं के पक्ष में हैं। मुस्लिम के पास जमीन का विशेष कब्जा नहीं।

- 1856 के पहले हिंदू भी मुख्य गुंबद अंदरुनी हिस्से में पूजा करते थे। जब हिंदुओं को अंदर जाने से रोका गया तो वह बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे।

- अंदरुनी हिस्से में मुस्लिमों की नमाज बंद हो जाने का कोई सबूत नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंग्रेजों ने दोनों पक्षों को अलग अलग रखने रैलिंग बनाई थी।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने का सबूत नहीं मिला है।

- चीफ जस्टिस ने कहा कि टाइटल सिर्फ आस्था से साबित नहीं होता है जमीन कानूनी आधार पर होगा जमीन का मालिकाना हक का फैसला

- चबूतरा, भंडारा, सीता रसोई से भी दावे की पुष्टि होती है।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ASI ने ईदगाह की बात नहीं कही। हिंदू विवादित स्थल पर पूजा करते रहे हैं। आस्था और विश्वास पर कोई विवाद नहीं हो सकता है। अयोध्या में राम के जन्म के दावे का किसी ने भी विरोध नहीं किया। हिंदू आस्था गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है।

- चीफ जस्टिस ने कहा कि विवादित ढ़ाचें में पुरानी संरचना की चीज का इस्तेमाल हुआ। इसमें पुराने पत्थर, खंबों का इस्तेमाल किया गया।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। सुन्नी वख्फ बोर्ड के दावे को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

- सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को कानूनी मान्यता दे दी है। चीफ जस्टिस ने कहा ASI की खुदाई के सबूतों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट का फैसला पारदर्शी तरीके से हुआ है।

- सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। निर्मोही अखाड़ा सेवादार भी नहीं है।

- चीफ जस्टिस ने कहा कि बाबर के दौर में मस्जिद बनाई गई थी। बाबर के वक्त में मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी।

- चीफ जस्टिस ने कहा कि 22-23 1949 दिसंबर को 2 मूर्तियां रखी गई थी। मस्जिद 1528 में बनी इससे फर्क नहीं पड़ता है। अयोध्या की जमीन नजूल की जमीन है।

- अयोध्या मामले के सबसे बड़े फैसले में पांच जजों की बेंंच का फैसला एकमत से आया है। चीफ जस्टिस ने जजमेंट पढ़ना शुरू कर दिया है। इसे पूरा पढ़ने में आधा घंटा लगेगा।

- फैसला सुनाने से पहले सभी जज सीजेआई के कोर्ट रूम में बैठेंगे। तब वहां पांचों जज और केस से जुड़े वकील ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। सभी जजों की सुरक्षा देर रात को ही बढ़ा दी गई थी। चीफ जस्टिस को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

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