मल्टीमीडिया डेस्क। अयोध्या मामले का फैसला आने के साथ ही अब इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह फैसला बाकी विवादित मामलों में नजीर बन सकेगा। देशभर में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जिनको लेकर सदियों से विवाद चल रहा है। संप्रदाय विशेष के इन धार्मिक स्थलों पर अक्सर दावे किए जाते हैं और यह तर्क दिया जाता है कि इनका निर्माण धार्मिक स्थल को तोड़कर किया गया था। इसलिए अब समय की मांग है कि हमलावारों के द्वारा बनाए गए इन धार्मिक स्थलों का कब्जा उनके वास्तविक हकदारों को सौंपा जाना चाहिए। लेकिन इस संबंध में 1991 में बनाए गए कानून पर गौर करना होगा, जिसमें धार्मिक स्थलों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है।

ऐसा है उपासना स्‍थल अधिनियम

इस बात की जानकारी देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विन उपाध्याय ने बताया कि1991 में केंद्र में काबिज नरसिम्हा राव सरकार ने एक कानून बनाकर धर्मस्थलों के संबंध में स्थिति को स्पष्ट कर दिया था। प्लेसेज ऑफ़ वॉर्शिप एक्ट यानी उपासना स्‍थल अधिनियम को 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था। यह भारतीय संसद का एक अधिनियम है। इस अधिनियम का मकसद 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए हुए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने और किसी स्मारक के धार्मिक आधार पर बदलने पर रोक लगाता है। लेकिन मान्यता प्राप्त प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों पर धाराएं लागू नहीं होंगी। इसके साथ ही इस अधिनियम से उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद और उक्त स्थान या पूजा स्थल से संबंधित किसी भी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही को भी छूट दी गई है। चूंकी इस कानून के बनाते वक्त राम जन्मभूमि विवाद काफी जोर पकड़ चुका था इसलिए तात्कालिक पीएम नरसिम्हाराव ने इस मुद्दे को हाथ लगाना उचित नहीं समझा, लेकिन इसके साथ ही इस कानून को बनाकर देशभर में फैले विवादित धर्मस्थलों को लेकर चल रही बहस और विवाद पर विराम लगा दिया।

अब राम मंदिर का मामला सुलझ जाने के बाद दूसरे धार्मिक स्थलों को लेकर चर्चाएं हो रही है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विन उपाध्याय का कहना है कि इस कानून के बन जाने से अब किसी भी विवादित धार्मिक स्थल को लेकर अदालत में कानूनी चुनौती नहीं दी जा सकती है, लेकिन इस कानून को बदलने के लिए या इसको रद्द करने के लिए अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

Posted By: Yogendra Sharma

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