Ayushman Bharat Yojana: कोरोना महामारी की सबसे ज्यादा कीमत गरीब वर्ग को चुकाना पड़ी है। काम धंधे ठप्प होने के बाद किसी पर बीमारी का हमला हो गया तो मुश्किलों का पहाड़ ही टूट पड़ा। ऐसे में सरकारी योजनाएं गरीबों का सहारा बनी है। ऐसी ही एक योजना है आयुष्मान भारत योजना, जिसने गरीबों का मुफ्त इलाज करने में अहम भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत लगभग 29000 गरीबों को Covid19 का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया। 2.24 लाख लाभार्थियों का मुफ्त में Covid19 का टेस्ट कराया गया। कोरोना मरीजों से संपर्क और परामर्श के लिए शुरू किए गए विभिन्न प्रयासों के तहत नेशनल हेल्थ अथारिटी (एनएचए) की ओर से 95 लाख से अधिक कॉल हैंडल की गईं। बता दें, एनएचए ही आयुष्मान भारत योजना का क्रियान्वयन करता है।

जानकारी के अनुसार, 30 जून तक के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि कुल 7.74 लाख ऐसे गरीब लाभार्थियों को फोन कर जानकारी ली गई कि उन्हें कोरोना से संबंधित कोई लक्षण तो नहीं है। लक्षण होने की स्थिति में तत्काल उनका टेस्ट और फिर जरूरत के मुताबिक इलाज किया गया।

NHA के अनुसार, 10 सितंबर तक आयुष्मान भारत के 2.24 लाख लाभार्थियों का कोरोना टेस्ट कराया गया है और उनमें से 28,882 कोरोना पाजिटिव मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया है। 2 साल पहले शुरू की गई इस योजना के तहत गरीबों को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त और कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाता है।

Ayushman Bharat के लाभार्थियों के अलावा कोरोना संकट के दौरान एनएचए ने कई और अहम जिम्मेदारियों को पूरा किया। कोरोना के लिए राष्ट्रीय Covid-19 हेल्पलाइन 1075 के प्रबंधन में एनएचए सहयोग कर रहा था। आठ सितंबर तक इस हेल्पलाइन पर 37.78 लाख कॉल आए। इस हेल्पलाइन पर हर दिन औसतन 10 से 15 हजार कॉल का जवाब दिया गया।

इसके अलावा आरोग्य सेतु ऐप के तहत लोगों को टेली कंसल्टेंसी सुविधाएं देने की जिम्मेदारी भी NHA ने संभाल रखा थी। 23 अप्रैल से शुरू हो कर 20 जून तक चली टेली कंसल्टेंसी के दौरान 20 लाख कॉल आए, जिनमें 50 हजार लोगों को डॉक्टरी सलाह भी प्रदान की गई।

Posted By: Arvind Dubey