Balakot Airstrikes 1st Anniversary : पाकिस्तान के अंदर घुसकर हवाई सर्जिकल एयर स्ट्राइक की प्लानिंग और उसे अंजाम देने वाले एयर मार्शल (रिटायर्ड) सी हरि कुमार ने बालाकोट हमले की पहली एनिवर्सिरी पर उस हमले के बारे में कई खुलासे किए हैं। उन्होंने पिछले साल ऑपरेशन के दौरान IAF के वेस्टर्न कमांड का नेतृत्व किया था। मिशन के दो दिन बाद सेवानिवृत्त हुए एयर मार्शल ने बताया कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के लिए बेहतरीन खुफिया जानकारी दी थी, जो एकदम सटीक थी। उसके को-ऑर्डिनेट्स भी दिए गए थे, जो सफल ऑपरेशन के लिए बहुत जरुरी होते हैं। हमारे ISR प्लेटफार्म्स और उपग्रहों से मिली जानकारी ने भी उन स्थानों की पुष्टि की थी।

कुमार ने कहा कि पुलवामा के बाद 15 फरवरी को प्रधानमंत्री ने इस घटना का जायजा लेने के लिए एक सीसीएस बैठक बुलाई थी और यह देखना चाहा था क्या किया जाना चाहिए। 15 तारीख को वायु सेना प्रमुख को पश्चिमी वायु कमान में जानकारी दी गई थी कि कौन से विकल्प उपलब्ध हैं। पिछले साल इस दिन, भारतीय वायु सेना ने जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाते हुए पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले किए थे। जैश ने पुलवामा में 14 फरवरी को घातक आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे।

उस समय हमने निशाना बनाए जाने वाले लक्ष्यों के एक निश्चित समूह को देखा। हालांकि, 18 फरवरी को हमें बालाकोट के बारे में बहुत अच्छी खुफिया जानकारी मिली, जिसे नेतृत्व से अवगत कराया गया था कि यह क्या है। उन्होंने कहा कि बालाकोट के आतंकी शिविर की दूरी को ध्यान में रखते हुए वायु सेना सबसे अच्छा विकल्प था, जो आतंकी शिविर को अच्छी तरह से निपटा सकता था।

इसलिए चुना गया मिराज

पूर्व एयर मार्शल ने कहा कि एक बार लक्ष्य तय किए जाने के बाद, उन लक्ष्यों को पूरी तरह तबाह करने के लिए क्या किया जा सकता है, इसके बारे में अधिक खुफिया जानकारी जुटाई गई। मिशन को अंजाम देने के लिए मिराज फाइटर जेट्स को ही भारतीय वायुसेना ने कैसे चुना, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा- अगर आप भौगोलिक रूप से बालाकोट को देखते हैं, तो यह एलओसी से 50 किमी से अधिक दूरी पर है। उस समय, मिराज ही एकमात्र विकल्प था, जो स्पाइस और क्रिस्टल मेज को ले जा सकता था और हमें बहुत बड़ी स्टैंड-ऑफ रेंज दे सकता था।

मिशन को गुप्त रखना चुनौती

एयर मार्शल हरि कुमार ने कहा कि वायुसेना के इस मिशन में कई चुनौतियां थी, जिसमें सबसे बड़ी इसे गुप्त रखना था। इसे गुप्त रखने के लिए मुझे अपने रूटीन के रूप में शुरू की गई और चल रही योजनाओं को जारी रखना था। 14 फरवरी को पुलवामा हुआ था, 16 फरवरी को पोखरण में वायु शक्ति थी, हम वायुसेना की क्षमताओं को दिखाने के लिए पूरे अभ्यास में आगे बढ़े।

एयर मार्शल ने बताया कि ऑपरेशन की प्लानिंग और उसके एक्जीक्यूशन के बीच, नेशनल वॉर मेमोरियल और एयरो इंडिया शो का उद्घाटन था और ये सभी योजना के अनुसार चलते रहे। मैं 39 साल से अधिक की सेवा के बाद 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो रहा था। इतने लंबे समय तक सेवा में रहने के कारण, विदाई और बहुत सारे अन्य कार्यों की एक प्रक्रिया होती है और उसे हमने उसी तरह से जारी रखा। बहुत ही कम व चुनिंदा लोगों को ही इसके बारे में जानकारी थी क्योंकि आज की दुनिया में बहुत तेजी से बातें फैल जाती हैं।

हमने मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया। सब कुछ या तो आमने-सामने होता था या सुरक्षित संचार (सिक्योर्ड लाइन) के माध्यम से होता था। केवल उन चुनिंदा लोगों को पता था कि क्या होना है और उसे क्या करना है। बड़ी तस्वीर के बारे में कोई नहीं जानता था।

ऐसे हुआ मिशन की तारीख का चयन

ऑपरेशन बालाकोट के लिए तारीख का चयन कैसे किया गया, इसके बारे में कुमार ने बताया- 18 फरवरी को जब हमें टारगेट मिले, तो हमने इस हमले को करने के लिए 26 फरवरी की अस्थायी तारीख तय की। वैसे 26 फरवरी को मेरा जन्मदिन भी था, तो मैंने सोचा कि यह एक उत्कृष्ट दिन होगा। इसलिए तारीख तय की गई। यह अनिवार्य रूप से कहा गया था कि एयरो इंडिया के बाद इस हमले को अंजाम दिया जाएगा, क्योंकि उस समय देश में बहुत सारे विदेशी नागरिक थे।

मिशन के लिए मौसम के चुनौती के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि मौसम तेजी से बदल रहा था। हमने फैसला किया कि हम इसे 26 फरवरी को करेंगे और यदि मौसम खराब होता है, तो हम इसे एक दिन आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यह 25 फरवरी को वायुसेना से मेरी विदाई हो रही थी। आकाश मेस में 25 तारीख को एक बड़ा भोज रखा गया था। वायुसेना प्रमुख ने मुझे बाहर लॉन में ले गए और फिर से पुष्टि करने के लिए पूछा कि सब कुछ ठीक है न। उस समय सभी उन्होंने कहा कि जब मिशन पूरा हो जाए, तो आप मुझे फोन करें और यदि आप "बंदर" कहते हैं, तो इसका मतलब है कि यह सफल रहा है और हर कोई सुरक्षित है। यह मिशन की सफलता का कोडवर्ड था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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