ममता बनर्जी और शरद पवार के बीच मुलाकात के बाद अब राजनीति शुरू हो गई है। आज शाम को ममता ने जब यह कहा कि यूपीए जैसी कोई चीज नहीं रह गई है, सभी विपक्षियों को एक होना चाहिये, तो इस पर कांग्रेस ने ऐतराज़ जताया है। राहुल गांधी के विदेश में चले जाने पर भी ममता ने बयान दिया जिससे इस बात ने तूल पकड़ लिया है। देर शाम कांग्रेस की तरफ से बयान आते रहे। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि क्या ममता बनर्जी को नहीं पता यूपीए क्या है? मुझे लगता है कि उन्‍होंने पागलपन शुरू कर दिया है। वह सोचती है कि पूरे भारत ने 'ममता, ममता' का जाप करना शुरू कर दिया है। लेकिन भारत का मतलब बंगाल नहीं है और अकेले बंगाल का मतलब भारत नहीं है। पिछले चुनावों (पश्चिम बंगाल में) में उनकी रणनीति धीरे-धीरे उजागर हो रही है।

'मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा' बीजेपी को खुश रखने के लिए आज ममता बनर्जी का रुख है। यूपीए सरकार में टीएमसी के 6 मंत्री थे। 2012 में ममता बनर्जी ने यूपीए से समर्थन वापस लेने के लिए कोई न कोई बहाना बनाया था। वह उस समय यूपीए सरकार को तोड़ना चाहती थीं। लेकिन वह सफल नहीं हुई क्योंकि अन्य पार्टियां थीं जिन्होंने तुरंत सरकार का समर्थन किया। यह उनकी पुरानी साजिश है। आज उनकी ताकत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि मोदी जी उनके पीछे खड़े हैं। इसलिए, वह कांग्रेस को कमजोर करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। जब बीजेपी पूरे भारत में संघर्ष कर रही है और उनकी स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, तो ममता बनर्जी ने उन्हें ऑक्सीजन देने का फैसला किया है। ममता बनर्जी बन गई हैं बीजेपी की ऑक्सीजन सप्लायर इसलिए, भाजपा उनसे खुश है।

शरद पवार ने कांग्रेस के खिलाफ कुछ नहीं कहा। वह एक वरिष्ठ नेता हैं। हम उसका बहुत सम्मान करते हैं। शरद पवार और अन्य दलों के लोगों को फंसाने और यह दिखाने के लिए कि भाजपा का एक विकल्प आ गया है, यह ममता बनर्जी की एक सोची-समझी साजिश है। इससे बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है। कांग्रेस हो या कोई अन्य पार्टी, बात यह है कि जो भाजपा के खिलाफ हैं, अगर वे एक साथ आएंगे, तो उनका स्वागत है।

Posted By: Navodit Saktawat