नई दिल्‍ली। BSNL और MTNL के बंद होने की अटकलों पर आखिर सरकार ने विराम लगा दिया है। बुधवार शाम कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला लिया गया कि सरकार इन्‍हें बंद नहीं करेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया है कि इन दोनों का विलय कर दिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने भारी घाटे में चल रही दूरसंचार कंपनियों-एमटीएनएल व बीएसएनल को उबारने के लिए पुनर्वास पैकेज मंजूर किया है। इसमें सॉवरेन बांड, संपत्तियां बेचने व कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) योजना जैसे कदम शामिल हैं।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार दोनों सरकारी संचार कंपनियों को उबारने के लिए 29,937 करोड़ रुपए लगाएगी। इसमें से 15,000 करोड़ रुपए बांड से जुटाए जाएंगे। अगले चार सालों में दोनों निगमों की संपत्तियां बेचकर 38,000 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। विलय प्रक्रिया पूरी होने तक एमटीएनएल बीएसएनल की सहयोगी कंपनी के रूप में काम करेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्य के स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनियों भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) को मिलाने का फैसला किया। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने घोषणा की और आश्वासन दिया कि एमटीएनएल या बीएसएनएल को न तो बंद किया जा रहा है और न ही विनिवेश किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, '' बीएसएनएल और एमटीएनएल का विलय हो जाएगा और सरकार 29,937 करोड़ रुपये कंपनियों के रिवाइव के लिए रखेगी। '' दोनों फर्मों के लिए केंद्र सरकार के पैकेज में 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन बॉन्ड शामिल हैं।

विलय की प्रक्रिया के दौरान, MTNL BSNL की सहायक कंपनी के रूप में कार्य करेगी। प्रसाद ने कहा कि कर्मचारियों को लागत में कटौती के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश की जाएगी।

बीएसएनएल और एमटीएनएल दोनों ही घाटे में चल रही कंपनियां हैं। बीएसएनएल के पास ऑन रोल पर 1.76 लाख कर्मचारी हैं और कंपनी ने वित्त वर्ष 2018-19 में ₹ 13,804 करोड़ का शुद्ध नुकसान दर्ज किया है। कंपनी 2009-10 से लगातार घाटा उठा रही है। एमटीएनएल पिछले कुछ वर्षों में निरंतर घाटा उठा रहा है।

Posted By: Navodit Saktawat

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