बुटाटी धाम, राजस्‍थान से नवोदित सक्‍तावत

नोटबंदी के बाद आंचलिक क्षेत्रों में उपजे नगदी के संकट को देखकर एक शख्‍स का मन इतना पिघला कि उसने कुछ बड़ा कदम उठाने की ठान ली। उसे जिन लोगों की मदद करना थी वे सुदूर गांव में थे जहां से बैंक और एटीएम 15 किमी दूर था। ऐसे में उसने बैंक से स्‍वयं एजेंट बनने का प्रस्‍ताव रखा। आज वे सफलतापूर्वक गांव में पचास से अधिक दुकानदारों को प्रतिदिन चलित एटीएम की सेवाएं देकर खुद पैसा विड्रावल करके देते हैं और इस तरह वे सरकार के डिजिटल इंडिया की अवधारणा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

यह कहानी है राजस्‍थान के नागौर जिले की ग्राम पंचायत राजौर निवासी ओमप्रकाश विश्‍नोई की, जो एक निजी बैंक के BC एजेंट के रूप में काम करते हैं। वे प्रतिदिन ग्राम बुटाटी स्थित बुटाटी धाम मंदिर परिसर में आते हैं। यहां वे मंदिर परिसर के तीन तरफ बनी सभी दुकानों पर खुद जाकर ट्रांजेक्‍शन करवाते हैं। चूंकि यह स्‍थान काफी सुदूर है इसलिए यहां बैंक, एटीएम जैसी सुविधाएं पहुंच से बाहर हैं। आज उनकी भूमिका यहां इतनी अहम हो गई है कि एक-एक दुकानदार उनके आने की बाट जोहता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भी विड्रावल की समस्‍या यहां हल हो जाती है। आइये जानते हैं इस शख्‍स की सेवाओं की यहां क्‍या अहमियत है।

ऐसे मिली प्रेरणा

विश्‍नोई बीमा एजेंट के रूप में बुटाटी आते थे। नोटबंदी के बाद उन्‍होंने पाया कि नगद को लेकर लोग बहुत परेशान हैं। उन्‍होंने इस संबंध में बैंक में जाकर बात की। वहां से डिजिटल ट्रांजेक्‍शन की आरंभिक ट्रेनिंग ली। बैंक ने उन्‍हें अधिकृत किया। हालांकि उन्‍हें इस काम के एवज में कमीशन मिलता है लेकिन जिस तरह का जोखिम उठाकर वे चलते हैं, वह सराहनीय है क्‍योंकि उनके अलावा दो-तीन अन्‍य एजेंटों ने केवल असुरक्षा के चलते इस काम में रुचि नहीं दिखाई। ओमप्रकाश ने हिम्‍मत नहीं हारी और अपना सेवा अभियान जारी रखा।

ऐसे होता है नगदी का इंतजाम

ओमप्रकाश विश्‍नोई बुटाटी धाम मंदिर परिसर में रोज शाम 6 से 9 बजे तक रहते हैं। मंदिर में प्रवेश के तीन तरफ गेट हैं। सभी गेट के बाहर मिलाकर 50 से अधिक होटल, भोजनालय, प्रसाद, बर्तन सहित अन्‍य सामग्रियों की दुकानें हैं। उनके पास बैंक की तरफ से दी गई आधिकारिक बायोमेट्रिक पीएसयू मशीन है, जिससे वे दुकानदार का एटीएम कार्ड लगाकर उसे चाही गई राशि निकालकर देते हैं। इस काम के लिए आधार कार्ड का बैंक खाते से लिंक होना अनिवार्य है।

यह है मुख्‍य संकट

बुटाटी मंदिर से 200 मीटर की दूरी पर एकमात्र एटीएम है लेकिन वह भी लगभग बंद ही रहता है। इसके अलावा यहां नगद का कोई और विकल्‍प नहीं है। यदि किसी को नगदी आहरण करना है तो सबसे पहले उसे टैक्‍सी से स्‍टेशन जाना होगा। स्‍टेशन से उसे कुचेरा कस्‍बा जाना होगा और वहां एक किलोमीटर पैदल चलकर एटीएम तक पहुंचना होगा।

3 घंटे का काम महज 5 मिनट में

इस काम में कम से कम 3 घंटे का समय और 300 तक रुपए खर्च हो जाते हैं। लेकिन विश्‍नोई के यहां आकर स्‍वयं पैसा देने से दुकानदारों का तीन घंटे का समय बच जाता है। यहां दस साल से दुकान चला रहे किशनलाल का कहना है वे प्रतिदिन 5 हजार रुपए का आहरण करते हैं।

बाइक से अकेले आते हैं, दो से ढाई लाख कैश साथ लाते हैं

ओमप्रकाश रोज बाइक से शाम को अकेले आते हैं। वे अपने साथ दो से ढाई लाख रुपए कैश लेकर चलते हैं। अपनी तरफ से कभी अवकाश नहीं मनाते। होली, दिवाली जैसे पर्व पर भी वे नियमित आते हैं। यदि किसी कारणवश नहीं आ पाते हैं और किसी को इमरजेंसी में पैसे की जरूरत होती है तो वे फोन लगाने पर स्‍वयं चले आते हैं। डेगाना तहसील में कुछ अन्‍य एजेंट भी हैं जो यह काम करते हैं लेकिन बुटाटी आने वाले वे एकमात्र हैं।

10-10 हजार करके खुद निकालते हैं ढाई लाख, लगता है एक घंटा

बुटाटी रवाना होने से पहले विश्‍नोई स्‍वयं जिस एटीएम से कैश निकालते हैं, वहां उन्‍हें इस काम में एक घंटा लग जाता है। इसकी वजह यह है कि उनकी तो विड्रावल लिमिट दो से ढाई लाख रुपए तक की है लेकिन एक बार में 10 हजार रुपए ही निकलते हैं। इसलिए उन्‍हें रोज 20 से 25 ट्रांजेक्‍शन तो खुद करना होते हैं। एक घंटे का समय तो यहां पहुंचने में ही लग जाता है। दुकानदारों द्वारा खाते से डेबिट किए गए पैसे विश्‍नोई के खाते में क्रेडिट होते हैं। बाद में सारा अमाउंट वे बैंक में जमा करा देते हैं।

रोज 70 से 80 ट्रांजेक्‍शन, ऐसा है पूरा सिस्‍टम

बुटाटी में किसी दुकानदार तो यदि 5 हजार रुपए की जरूरत है तो वह अपना एटीएम देकर पूरी प्रोसेस के बाद विश्‍नोई से नगद पैसे ले लेता है। एक दिन में कम से कम 70 से 80 ट्रांजेक्‍शन होते हैं। इनसे औसतन 1 से सवा लाख रुपया कैश विड्रावल सहित डिपॉजिट भी होता है। ट्रांजेक्‍शन करवाने वालों में दुकानदारों के अलावा बाहर से आए मरीजों के परिजन भी होते हैं। किसी के पास यदि KYC की हार्ड कॉपी नहीं है लेकिन पेटीएम अकाउंट है तो भी उसका काम हो जाता है। इस संवाददाता को उन्‍होंने आज की ट्रांजेक्‍शन समरी दिखाई जिसमें गुरुवार को 3 लाख 68 हज़ार रुपए का ट्रांजेक्‍शन दर्ज किया गया।

मैं डर जाउंगा तो लोगों का क्‍या होगा

इतना सारा कैश साथ में लेकर अकेले चलने से क्‍या डर नहीं लगता? पूछे जाने वे बताते हैं कि यदि मैं डरकर बैठ गया तो यहां जो लोग उम्‍मीद लगाए बैठे हैं, उनका क्‍या होगा। वे कहते हैं यह संत की भूमि है, यहां धर्म का प्रभाव है। यहां आकर किसी के मन में लूट, अपराध की भावना नहीं आ सकती। आज की ही बात है। यहां आने से पहले उनके बस स्‍टैंड स्थित ऑफिस की चाबी गुम हो गई थी। उन्‍होंने तत्‍काल ताला तुड़वाया और सामग्री लेकर यहां पहुंचे। इस संवाददाता ने स्‍वयं देखा कि शाम को यहां आते ही ट्रांजेक्‍शन के इंतजार में बैठे लोगों ने उन्‍हें घेर लिया।