नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने 2017-18 के दौरान विभिन्न मदों में आवंटित बजट से 1,157 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इन खर्चों के लिए संसद की पूर्व अनुमति नहीं ली गई। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की मंगलवार को संसद में पेश रिपोर्ट में यह बात कही गई है। केंद्र सरकार के खातों की वित्तीय ऑडिट संबंधी कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017-18 के दौरान संसद की पूर्वानुमति के बिना 1,156.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय ने नई सेवाओं या नए सेवा साधनों के संबंध में उपयुक्त तंत्र तैयार नहीं किया, जिसकी वजह से ज्यादा खर्च हुआ। वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाला आर्थिक मामलों का विभाग अतिरिक्त खर्च के वास्ते प्रावधान बढ़ाने के लिए विधायी स्वीकृति लेने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में कहा गया कि दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अनुदान सहायता, सब्सिडी और प्रमुख कार्यों के लिए नई सेवा के प्रावधान को बढ़ाने के लिए पहले संसद की अनुमति लेने की जरूरत होती है।

लोक लेखा समिति (पीएसी) ने अपनी 83वीं रिपोर्ट में 'अनुदान सहायता' और 'सब्सिडी' प्रावधान बढ़ाने के मामलों पर गंभीरता से विचार किया था। पीएसी ने कहा था कि ये गंभीर खामियां संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा दोषपूर्ण बजट अनुमान और वित्तीय नियमों में कमियों की तरफ इशारा करती हैं।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वित्त मंत्रालय की ओर से सभी मंत्रालयों/ विभागों पर वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए एक प्रभावी तंत्र तैयार करना जरूरी है ताकि इस तरह की गंभीर खामियों को फिर से नहीं दोहराया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएसी की सिफारिशों के बावजूद वित्त मंत्रालय ने उपयुक्त तंत्र नहीं तैयार किया, जिससे 2017-18 में 13 अनुदानों के मामले में संसद की मंजूरी के बिना कुल 1,156.80 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए।

अतिरिक्त खर्च करने में वित्त मंत्रालय ने स्वयं के निर्देशों का उल्लंघन किया कैग ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने पहले कहा था कि धन का कोई भी पुनः विनियोजन, जो 41-सीक्रेट सर्विस एक्सपेंडिचर को 25 फीसद या उससे अधिक बढ़ाता है तो ऐसा सिर्फ कैग की अनुमति से ही किया जा सकता है। हालांकि दो बार ऐसा हुआ कि वित्त मंत्रालय ने अपने ही निर्देशों का उल्लंघन किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017-18 के लिए गृह मंत्रालय के तहत आने वाली पुलिस के लिए कुल मूल प्रावधान 163.65 करोड़ रुपये था, लेकिन गृह मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय की मंजूरी से 150 करोड़ रुपये और खर्च कर लिए। एक अन्य मामले में गृह मंत्रालय के तहत कैबिनेट के लिए केवल पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन गृह मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय की मंजूरी लेकर 1.25 करोड़ रुपये और खर्च कर लिए।

कैग की स्वीकृति लेना विभाग का काम

वित्त मंत्रालय अपने जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वह पहले कैग की मंजूरी ले। वित्त मंत्रालय की इस दलील को कैग ने स्वीकार नहीं किया और कहा कि वित्त मंत्रालय की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि बजट प्रावधान पर 'सीक्रेट सर्विस एक्सपेंडिचर' में वृद्धि कैग की पूर्व स्वीकृति के साथ हो।