दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों को जहरीली हवाओं से बचाने की जंग वैसे तो साल 2015 से छिड़ी हुई है। इसके कुछ सकारात्मक परिणाम भी आए हैं। लेकिन समस्या अब भी बनी हुई है। बारिश के बाद मौसम में बदलाव के साथ हर साल जहरीली हवाओं का खौफ सब पर छाने लगता है। इस बार भी इसकी आहट लगते ही केंद्र से लेकर दिल्ली और उसके सभी पड़ोसी राज्य फिर सक्रिय हो गए हैं। नए सिरे से इस जंग की रणनीति बनाई गई है। हालांकि, इस समस्या की याद सिर्फ इसी सीजन में आती है।

जहरीली हवाओं को लेकर राजनीति भी खूब होती है। हर कोई पंजाब, हरियाणा में जलने वाली पराली को इसके लिए जिम्मेदार बताता है। लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर का कहना है कि इन जहरीली हवाओं के पीछे की वजह सिर्फ पराली नहीं है। इनमें पराली का धुआं सिर्फ 40 फीसद ही होता है। बाकी 60 फीसद प्रदूषण स्थानीय वजहों से होता है। इनमें धूल, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण कार्यों सहित उद्योगों से होने वाला प्रदूषण शामिल है। ऐसे में प्रदूषण से बचाव के लिए पराली जलाने पर रोकथाम के साथ स्थानीय प्रदूषण में भी कमी लाने की जरूरत है। राज्यों को इसके रोकथाम की जवाबदेही भी दी गई है। इसके साथ ही पराली जलाने की घटनाओं और वायु प्रदूषण की गुणवत्ता पर चौबीसों घंटे निगाह रखी जाएगी। राज्यों से भी इसे लेकर हर दिन रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 टीमें गठित की गई हैं।

पराली को नष्ट करने के लिए ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल होगा डीकंपोज

राज्यों के साथ बैठक में पराली को खेत में ही नष्ट करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के पूसा केंद्र द्वारा विकसित डिकंपोज को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्य इस साल इसका ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। इसके जरिये दिल्ली ने 800 हेक्टेयर, पंजाब ने 100 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश ने 10,000 हेक्टेयर की पराली को नष्ट करने की योजना बनाई है। आइसीएआर को डिकंपोज के लिए ऑर्डर भी कर दिया है। यह डिकंपोज वैक्टीरिया से तैयार किया जाता है। हालांकि, डीकंपोज के जरिये पराली नष्ट करने की समयावधि को लेकर सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पराली को नष्ट होने में 25 से 36 दिन तक लगता है। जबकि किसानों के पास धान कटने के बाद दूसरे फसल की बोआई के लिए इतना समय नहीं होता है।

दिल्ली सहित पड़ोसी राज्यों के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बनाई योजना

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गुरुवार को दिल्ली और एनसीआर को प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ बैठक की। इसमें स्थितियों से निपटने का रोडमैप तैयार किया गया। पंजाब जैसे राज्यों ने पैसे की कमी की समस्या बताई। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि वे कृषि अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराई गई 80 करोड़ की राशि का इसमें इस्तेमाल कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के हॉट स्पाट पर नजर रखने का निर्देश दिया। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के सबसे खतरनाक 25 क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। इनमें अकेले 13 दिल्ली के क्षेत्र हैं। इस वर्चुअल बैठक में पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों के पर्यावरण मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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Posted By: Navodit Saktawat

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