प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम। बोर्ड परीक्षाओं का डर विद्यार्थियों को तनाव में डाल देता है। इस वजह से कई बार विद्यार्थी अतिरिक्त तनाव ले लेते हैं और प्रतिभावान होते हुए भी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए परीक्षाओं को कुछ सुगम बनाने की आवश्यकता है। इस बात को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अधिकारी भी मानते हैं।

सोमवार को पाम गुरुग्राम के टाउन एंड कंट्री क्लब में आयोजित गुड़गांव प्रोग्रेसिव स्कूल काउंसिल (जीपीएससी) के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों को अधिक स्टूडेंट फ्रेंडली बनाएगा, ताकि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त तनाव न हावी हो।

उन्होंने कहा कि अभिभावक व स्कूल एक साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नींव रख सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि पठन-पाठन को प्रभावी बनाने के लिए कक्षा में खुशनुमा माहौल बनाने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को रटने की जगह नई तकनीक के जरिये वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़कर पढ़ाने पर जोर देना चाहिए। परीक्षा के पहले स्कूलों में तनावमुक्ति सत्रों का आयोजन किया जाना चाहिए और साथ ही अभिभावकों को चाहिए कि वह घर पर भी विद्यार्थियों को तनाव रहित माहौल दें।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने पिछले नौ महीनों में कई सुधार किए हैं और परीक्षाओं को सुगम बनाने की तैयारी में है ताकि विद्यार्थी तनावमुक्त रहें। इसके लिए परीक्षा के उपनियमों में सुधार भी किया जाएगा। प्रतिवर्ष विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन को लेकर जूझना पड़ता है, इसके लिए उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया को त्रुटि रहित बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया विद्यार्थी केंद्रित होनी चाहिए। इसके लिए सीबीएसई देशभर में शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी कर रहा है। इसमें शिक्षकों को सिखाया जा रहा है कि किस तरह से वह मूल्यांकन करें कि पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता खत्म हो सके।