Chandra Grahan 5 June 2020: इस वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण आज रात लगने जा रहा है। ग्रहण काल को लेकर खानपान, आहार, व्‍यवहार एवं दिनचर्या को लेकर धार्मिक मान्‍यताएं हैं। सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेट पर इस तरह की कई बातें आपको पढ़ने व सुनने को मिल जाएंगी कि ग्रहण के दौरान हमारी आहारचर्या कैसी होनी चाहिये। हिंदू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान कुछ खाना पीना नहीं चाहिये, लेकिन यदि आवश्‍यक है तो यह अपवाद माना जाता है। लेकिन आपको यह भी जानना चाहिये कि ग्रहण के दौरान आप क्‍या खाएं इससे ज्‍यादा इस पर ध्‍यान दें कि क्‍या नहीं खाएं और किन खाद्य पदार्थों को नजर अंदाज करें। यहां हम आपको ऐसी ही जानकारी देने जा रहे हैं।

भारी अनाज ना खाएं तो अच्‍छा

- ग्रहण के दौरान भारी अनाज जैसे मैदा, काली दाल खाने से बचना चाहिये क्‍योंकि वैसे भी इनको पचाना कठिन होता है। ग्रहण के समय तो शरीर की पाचन क्षमता प्रभावित हो जाती है, ऐसे में इन चीजों का सेवन मुश्किल पैदा कर सकता है। बेहतर होगा आप ग्रहण के दौरान मोटा अनाज खाने से बचें।

मसालेदार और गरिष्‍ठ भोजन ना करें

तला हुआ, डीप फ्रायड या ऐसा मसालेदार खाना जो हमारे शरीर का तापमान बढ़ा दे, उसका सेवन हमें ग्रहण के दौरान टाल देना चाहिये। इस तरह का स्‍पाइसी खाना पचाने में शरीर को भी मशक्‍कत करना पड़ेगी। ग्रहण के दौरान हमने मसालेदार कुछ खाया है तो हो सकता है हमें पेट या पाचन संबंधी तकलीफें भुगतना पड़ें। बेहतर होगा ग्रहण के दौरान आप तले और मसालेदार खाने को छोड़ दें।

मांसाहार करने से बचें

मांसाहार ऐसा आहार है जिसका सेवन करने पर सामान्‍य तौर पर भी हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन की अधिक मात्रा के कारण ऐसा होता है। इस एक्‍सेस प्रोटीन के चलते शरीर को इसे पचाने में बेहद परेशानी आती है। यदि आप पिछले कुछ समय से बीमार रहे हैं तो ग्रहण के दौरान को आपको अंडा, मटन आदि चीजों को कतई हाथ भी नहीं लगाना चाहिये। जो लोग स्‍वस्‍थ हैं, वे भी ग्रहण के दौरान नॉनवेज ना खाएं तो बेहतर होगा।

ग्रहण के समय खुला पानी पीने से बचें, हो सकता है यह परिणाम

ग्रहण के दौरान वैसे तो कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिये लेकिन हां अगर बहुत अधिक प्‍यास लगी हो तो पानी तो कम से कम पिया ही जा सकता है। लेकिन इसमें भी एक बात का ध्‍यान रखना होगा कि उस पानी को आप कतई ना पीएं तो लंबे समय से या तो खुला रखा है या ग्रहण के दौरान वह खुला रहा हो। इसका सीधा सा कारण है कि ग्रहण के दौरान पृथ्‍वी एवं वायुमंडल में होने वाले कॉस्मिक परिवर्तनों के चलते पानी में कुछ निश्चित प्रकार की प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसे में अगर पानी पीना ही है तो बेशक पीएं बशर्ते वह ढंका हुआ हो।

जानिये कैसे लगता है चंद ग्रहण

सभी जानते हैं कि चंद्रमा पृथ्‍वी का उपग्रह है। यह सूर्य से अपनी रोशनी प्राप्‍त करता है। इसकी अंडाकार धुरी पर यह एक महीने में पृथ्‍वी का पूरा एक चक्‍कर काट लेता है। पृथ्‍वी और चंद्रमा की धुरियां एक दूसरे पर 5 डिग्री का कोण बनाती हैं और दो जगहों पर काटती हैं। ये दोनों स्‍थान ग्रंथि कहलाते हैं। चांद और पृथ्‍वी परिक्रमा करते हुए सूर्य की सीधी रेखा में नहीं आते हैं, यही कारण है कि पृथ्‍वी की छाया चंद्रमा पर नहीं पड़ती।

तंत्र मंत्र की साधना संभव

इस ग्रहण काल में तंत्र मंत्र की साधना की जा सकती है। इसका सूतक नहीं होगा क्‍योंकि जहां ग्रहण होता है सूतक वहीं होगा। भारत में यह लागू नहीं होगा।

(ज्‍योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा सीहोर से चर्चा के अनुसार)

Posted By: Navodit Saktawat

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