बेंगलुरु। भारत का चंद्रयान-2 बुधवार को धरती की कक्षा छोड़कर चांद की ओर रवाना हो जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO) ने 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत के दूसरे चंद्र अभियान को लॉन्‍च किया था। तब से यह यान धरती की कक्षा में घूम रहा था। यह ऑर्बिटर मिशन था। इसने करीब 10 महीने चांद की परिक्रमा की थी। चांद पर पानी की खोज का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

क्‍या है यह प्रक्रिया

इस प्रक्रिया को ट्रांस लुनार इंसर्शन TLE) कहा जाता है। इसरो के अनुसार, 20 अगस्त को यान चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा। इसके बाद चांद की अलग-अलग कक्षाओं में घूमते हुए सात सितंबर को चांद पर इसकी लैंडिंग होनी है। लांचिंग के बाद से इसरो अब तक पांच बार इसकी कक्षा में बदलाव कर चुका है। पांचवां बदलाव छह अगस्त को किया गया था।

अभी तक यह हुआ

22 जुलाई को इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 की मदद से चंद्रयान-2 को लांच किया गया था। लांचिंग के कुछ मिनट बाद ही रॉकेट ने इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया था। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं- ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान'।

आगे यह होगा

ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए प्रयोगों को अंजाम देगा। वहीं लैंडर और रोवर चांद पर उतरेंगे। इनके प्रयोग की अवधि 14 दिन की रहेगी। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी धु्रव पर उस हिस्से में उतरेंगे, जहां अब तक कोई यान नहीं पहुंचा है।

भारत को हासिल होगा यह गौरव

चांद पर लैंडिंग के साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ऐसा कर चुके हैं। चांद के रहस्य जानने की दिशा में यह भारत का दूसरा अभियान है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लांच किया था।

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