नई दिल्ली। चांद की सतह पर चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग से ISRO चूक गया था। इसके बाद से ही लगातार इससे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। इस बीच पूर्व इसरो वैज्ञानिक मायलस्वामी अन्नादुराई का बड़ा बयान सामने आया है। अन्नादुराई ने ISRO के दोबारा विक्रम लैंडर से संपर्क करने को बेहद मुश्किल बताया है। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि चांद की सतह पर मौजूद बाधाएं संपर्क होने से रोकेंगी।

मायलस्वामी अन्नादुराई चंद्रयान 1 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि विक्रम लैंडर से एक तरफा संपर्क साधा जा सकता है। बता दें कि बीते शनिवार को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान 2.1 किलोमीटर पहले इसरो का विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था।

इसके बाद से ही ISRO के वैज्ञानिक विक्रम लैंडर से संपर्क साधने के लिए दिन रात कोशिशों में जुटे हुए हैं। रविवार को वैज्ञानिकों ने लैंडर को लोकेट करने में सफलता हासिल कर ली है। हालांकि अब तक वे लैंडर से संपर्क नहीं स्थापित कर सके हैं।

अन्नादुराई ने कहा कि 'हमने चंद्रमा की सतह पर लैडंर को लोकेट कर लिया है। अब हमें उससे संपर्क स्थापित करना होगा। जहां लैंडर स्थापित हुआ है, ऐसा लगता है कि वह जगह लैंडिंग के लिए सही नहीं थी। वहां कुछ बाधाएँ हैं। इस वजह से संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है।'

उन्होंने ये भी जोड़ा कि ISRO विक्रम लैंडर से एक तरफा संपर्क स्थापित कर सकता है लेकिन यह 5-10 मिनिट से ज्यादा नहीं होगा। ऑर्बिटर और लैंडर में हमेशा दो तरफा संपर्क होना चाहिए। लेकिन हम एकतरफा संपर्क की कोशिश कर सकते हैं। ये मुश्किल परिस्थिति है लेकिन हमारे वैज्ञानिक ये करने में सक्षम हैं।

बता दें कि भले ही भारत विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने में नाकाम रहा है लेकिन भारत के इस मिशन का दुनिया में भी लोहा माना जा रहा है।

Posted By: Neeraj Vyas

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