नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं होने से निराशा है, लेकिन ISRO के वैज्ञानिकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वैज्ञानिको के साथ ही पूरा देश प्रार्थना कर रहा है कि जैसे चंद्रयान-1 के साथ हुआ था, वैसा ही चंद्रयान-2 के साथ होगा और संपर्क एक बार फिर स्थापित हो सकेगा। जानिए क्या हुआ था चंद्रयान-1 के साथ -

चंद्रयान-1 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा था। उसके बाद से यान चंद्रमा की सतह से 140 किमी ऊपर सफलतापूर्वक चक्कर लगाता है। इसी दौरान चंद्रयान-1 ने पता लगाया था कि चंद्रमा पर पानी है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए हैरान करने वाली थी।

इस दौरान 29 अगस्त 2009 तक चंद्रयान-1 ने चंद्रमा से संबंधित सैकड़ों फोटोग्राफ और डाटा दिए। 29 अगस्त 2009 को ही 11 महीने बाद चंद्रयान-1 का इसरो से संपर्क टूट गया।

इसके बाद 10 मार्च 2017 को अमेरिकी स्पेस एजेंसी (नासा) के जेट प्रोप्लशन लेबोरेट्री (जेपीएल) से खबर आई कि चंद्रमा के 160 किमी ऊपर कोई वस्तु चक्कर लगा रही है। जब इसके बारे में पता लगाया गया तो पता चला कि चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगा रहा यह चंद्रयान-1 ही है। इस तरह चंद्रयान-1 अब तक चंद्रमा के ऊपर चक्कर लगा रहा है। अभी यह चंद्रमा की सतह से 200 किमी दूर चक्कर लगा रहा है।

नासा ने इसके लिए अंतरग्रहीय राडार का इस्तेमाल किया था। इन्हीं राडार का इस्तेमाल धूमकेतू का पता लगाने के लिए किया जाता था। नासा ने चंद्रयान-1 के साथ ही एक अन्य रोबोटिक यान का भी पता लगाया था।

Posted By: Arvind Dubey