नई दिल्ली। चंद्रयान-2 अब तक के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब चंद्रमा पर लैंड करने को पूरी तरह तैयार है। ISRO का यह मिशन कई मायनों में बहुत अहम है। चंद्रयान-1 ने यह पता लगाया था कि चंद्रमा पर पानी है और चंद्रयान-2 यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि यह पानी कैसा और कितना है। इसके अलावा कई तरह के अध्ययन किए जाएंगे, जिनमें हीलियम-3 को लेकर जुटाई जाने वाली जानकारी बहुत अहम है।

बता दें, धरती पर हीलियम-3 की मात्रा बहुत कम है। जबकि नासा के मुताबिक, चंद्रमा पर यह प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। चंद्रयान-2 हीलियम को लेकर भी अध्ययन करेगा और पूरी दुनियो को अहम जानकारी देगा। वैज्ञानिकों को कहना है कि यदि भविष्य में हम चंद्रमा पर मौजूद हीलियम-2 को धरती पर ला पाए तो ऊर्जा की कमी पूरी हो जाएगी और धरती पर कभी अंधेरा नहीं होगा।

चांद पर इन्सानी बस्तियां बसाने की कवायद

इन्सासन चंद्रमा पर बस्तियां बसाना चाहता है। चंद्रयान-2 से इस दिशा में आगे की जानकारियां मिलेंगी। अगर चंद्रयान-2 के प्रज्ञान रोवर के सेंसर चांद के दक्षिणी ध्रुव के विशाल ज्वालमुखीय गड्ढों से पानी के सबूत तलाश पाते हैं, तो वैज्ञानिक मानते हैं कि आगे चल कर चांद पर इंसान के रहने वाले स्पेस स्टेशन बनाए जा सकेंगे।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी तो नहीं, लेकिन, भविष्य में, या संभवतः आज से 50 साल बाद ऐसी तकनीक होगी जिसकी मदद से हम लोगों को चांद की सैर पर ले जा सकेंगे।

अमेरिका 2024 तक चांद के इसी हिस्से इन्सान को भेजने की योजना बना रहा है। जाहिरतौर पर चंद्रयान-2 से मिलने वाली सूचनाओं पर उसका सबसे ज्यादा ध्यान है।

Posted By: Arvind Dubey