नई दिल्ली। चंद्रयान-2 अपनी मंजिल के बहुत करीब पहुंच गया है। अब चंद्रयान का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह से महज 35 किमी ऊपर है। ISRO के वैज्ञानिक सही समय पर इसकी लैंडिंग तय करेंगे। (आज रात 1.30 से 3.30 बजे के बीच)। इसे लैंड करने में करीब 35 मिनट का समय लगेगा। अगले चरण में प्रज्ञान रोवर चंद्रमा की सतह पर चलेगा। यह काम शनिवार सुबह 5.30 से 6.30 के बीच होगा।

इसके बाद विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर, दोनों अपने-अपने अध्ययन शुरू कर देंगे। ये 14 दिन ही काम कर पाएंगे, क्योंकि उसके बाद सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचने से इन्हें ऊर्जा नहीं मिलेगी। बता दें चंद्रमा पर एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है।

14 दिन बाद प्रज्ञान रोवर अपने सभी परिक्षण पूरे कर लेगा। वहीं ऑर्बिटर, जो कि चंद्रमा की सतह से 140 किमी दूर है, अगले दो साल तक अध्ययन करता रहेगा। ऑर्बिटर पर अलग-अलग तरह के कैमरे लगे हैं, जो चांद की सतह की तस्वीरें भेजेंगे।

इस बात की भी प्रबल संभावना है कि चांद के चक्कर लगाते समय ऑर्बिटर की नजर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर भी पड़ेगी, जो अपने काम पूरे करने के बाद सतह पर रखे होंगे।

अमेरिका ने भेजा है ऐसा लेजर उपकरण

चंद्रयान-2 पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भी अपना एक उपकरण भेजा है। यह लेजर रिफ्लेक्टर की तरह काम करेगा औ इसका मसकद चंद्रमा पर दूरी का सही-सही पता लगाना है। इस तरह इसरो के साथ ही नासा के वैज्ञानिक भी चंद्रयान की मदद से बहुत कुछ हासिल करेंगे। यह प्रयोग 50 साल बाद होगा। पिछली बार अपोलो ने ऐसा किया था।

चंंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 का फर्क

चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की सतह से 140 किमी ऊपर रहकर अध्ययन किया था, जबकि चंद्रयान-2 वहां उतरेगा। इसी तरह चंद्रयान-1 ने बता लगाया था कि वहां पानी है, जबकि चंद्रयान-2 यह जानकारी भेजेगा कि पानी कैसा है।

Posted By: Arvind Dubey