बेंगलुरू। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग का इंतजार कर रहे पूरे देश को उस समय निराशा मिली जब ISRO ने ऐलान किया कि विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी उम्मीद खत्म नहीं हुई है। विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि जल्द डाटा मिलने लगेगा। जानिए इससे जुड़ी बड़ी बातें -

- वैज्ञानिकों के मुताबिक, विक्रम लैंडर जब चंद्रमा की सतह से महज 1.2 किमी दूर था, तब संपर्क टूट गया। इसके पीछे अटकलें लगाई जा रही हैं कि हो सकता है लैंडिंग के दौरान डाटा लिंक टूट गई हो। इस डाटा लिंक को पुनः स्थापित किया जा सकता है।

- सिग्नल नहीं मिलने का एक कारण चंद्रमा की धूल भी हो सकती है। हो सकता है कि कुछ समय बाद धूल कम हो और सिग्नल मिलने लगे।

- सबसे बड़ी आशंका यह है कि लैंडिंग के दौरान विक्रम लैंडर क्रैश हो गया हो। अब यदि उसमें से प्रज्ञान रोवर बाहर निकलने में कामयाब रहता है तो संभव है कि सिग्नल मिलने लगें।

मिशन फेल नहीं, सफल है

चंद्रयान-2 के साथ 14 पे-लोड भेजे गए थे। इनमें से 8 पे-लोड उस ऑर्बिटर में हैं, जो चंद्रमा की सतह से करीब 140 किमी दूर चंद्रमा की परिक्रम कर रहा है।

ऑर्बिटर देखेगा क्या हुआ विक्रम लैंडर को

इसरो की नजर अब ऑर्बिटर पर है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब यह ऑर्बिटर उस स्थान के ऊपर से गुजरेगा, जहां विक्रम लैंडर ने लैंड करने की कोशिश की है, तो पता लगेगा कि वास्तव में हुआ क्या।