बेंगलुरु। चंद्रयान-2 चांद के सफर पर निकल गया है, बुधवार अल सुबह इसने धरती की कक्षा छोड़ दी और रवाना हो गया चांद के उस सफर पर जिसका सभी को इंतजार था। 20 अगस्त को यह चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा और वहां भी एक के बाद एक कक्षाएं बदलते हुए चांद की धरती पर उतरेगा।

इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार चंद्रयान ने रात 2.21 बजे धरती की कक्षा छोड़ी और लुनार ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी में प्रवेश कर गया। अपने ट्वीट में इसरो ने लिखा है, 'आज के ट्रांस लुनार ट्रांजिट के बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी की कक्षा से बाहर हो गया और आगे के सफर पर निकल गया है। चंद्रयान-2 के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है और लॉन्च होने के बाद से ही इसके सभी फंक्शन पूरी तरह से काम कर रहे हैं।'

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत के दूसरे चंद्रयान लॉन्च किया था। तब से यह यान धरती की कक्षा में घूम रहा था। बुधवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे वैज्ञानिकों द्वारा कक्षा में बदलाव के बाद यान चांद की ओर रवाना हो गया। इस प्रक्रिया को ट्रांस लुनार इंसर्शन (टीएलआइ) कहा जाता है।

इसरो के अनुसार, 20 अगस्त को यान चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा। इसके बाद चांद की अलग-अलग कक्षाओं में घूमते हुए सात सितंबर को चांद पर इसकी लैंडिंग होनी है। लॉन्चिंग के बाद से इसरो अब तक पांच बार इसकी कक्षा में बदलाव कर चुका है। पांचवां बदलाव छह अगस्त को किया गया था।

इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-2 20 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद इसका लिक्विड इंजन फिर से फायर करके चांद की कक्षा में जाएगा। इसके बाद कुल 4 ऑर्बिट मेनीवर्स होंगे जिसकी मदद से चंद्रयान-2 चांद की कक्षाएं बदलते हुए उसकी सतह के पास पहुंचेगा।

चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं- ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान'। ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए प्रयोगों को अंजाम देगा। वहीं लैंडर और रोवर चांद पर उतरेंगे। इनके प्रयोग की अवधि 14 दिन की रहेगी। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी धु्रव पर उस हिस्से में उतरेंगे, जहां अब तक कोई यान नहीं पहुंचा है।

चांद पर लैंडिंग के साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ऐसा कर चुके हैं। चांद के रहस्य जानने की दिशा में यह भारत का दूसरा अभियान है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लांच किया था। यह ऑर्बिटर मिशन था। इसने करीब 10 महीने चांद की परिक्रमा की थी। चांद पर पानी की खोज का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

Posted By: Ajay Barve